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दो कुत्ते टॉमी और डेविड कचरे के ढेर में हड्डी खोज रहे थे।
तभी उन्हें एक रोटी मिली,, आपस में लड़ने के बजाय उन्होंने तय किया कि कोई एक कुत्ता उस रोटी को रख लेगा और बदले में दूसरे के लिए हड्डी खोजेगा।
टॉमी ने रोटी खाई अतः शर्त मुताबिक उसे डेविड के लिए हड्डी खोजनी थी।
दो दिनों तक टॉमी को कुछ नहीं मिला, भूख से उसका बुरा हाल था। एक दिन उसे हड्डी और भोजन मिल गई,, भूख से व्याकुल टॉमी ने उसे खा ली।
इधर यह बात डेविड को पता चली कि हड्डी मिलने पर भी टॉमी ने उसे हड्डी नही दी और शर्त का पालन नही किया।
अब डेविड शिकायत के लिए कुत्तो की मंडली जाने का फैसला किया।
तभी रास्ते मे उसके पास हाँफते हुए एक कुत्ता आता है..... और उसे बताता है कि टॉमी को हड्डियों का ढेर मिला है और उसने खाने के लिए डेविड को बुलाया है।
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तातपर्य यह है कि *जब अस्तित्व की लड़ाई हो तब ध्यान केवल अस्तित्व की रक्षा करने में जाता है।*
वही शर्त पालन, दूसरों की सहायता, दान दक्षिणा इत्यादि,, प्रायः _*अतिरिक्त धन या साधन*_ उपलब्ध होने पर किया जाता हैं।
यही कारण है कि प्रस्तुत कहानी में टॉमी दो दिनों तक भूखा रहने के बाद मिलने वाले भोजन को खुद खा लिया क्योंकि उन्हें अपनी प्राण बचानी थी।
इसके बाद हड्डियों का ढेर मिलने पर, उसके पास अतिरिक्त साधन की अवस्था में वह अपना शर्त पालन करता है।
हरिश्चंद्र जैसे कुछ लोग अपवाद स्वरूप होते है जो स्वयं अत्यंत भूख की अवस्था में होने पर भी भूखे भिखारी को भोजन दे देता है।
*मोराल यह है कि यदि हरिश्चंद्र जैसा नही बना जा सकता तो क्या हुआ?टॉमी जितना नैतिक स्तर तो आसानी से पाया जा सकता है।*
धन्यवाद।।
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