सोमवार, 22 जनवरी 2024

सबसे ज्याद जरूरी काम || Sabse jyada jaruri kam

भोलू हर रोज की तरह अपने पान ठेले पर बैठा पान बना रहा था।


उसी समय एक कार आकर ठेले के पास रुका उसमें से सूट पहने एक आदमी गाड़ी के काँच को नीचे कर किसी का पता ठेले पर बैठे भोलू से पूछता है।


भोलू ने उस आदमी को पता बताया।


कार मे बैठे आदमी भोलू को कुछ देर तक घूरता रहा शायद वह पहचानने की कोशिश कर रहा था।


फिर कार से बाहर आकर उसने भोलू को पूछा- 'क्या तुम भोलू हो जो कदमनगर के सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाई की थी। '

भोलू ने कहा - हाँ

कार वाले आदमी ने कहा - 'अरे भाई मै गोलू हूँ, तुम्हारे साथ एक ही क्लास में पढ़ाता हैं।'


दरअसल दोनो स्कूल के सहपाठी थे, दोनों ने खुशी खुशी एक दूसरे को गले लगाया।


गोलू ने बताया कि वह एक बड़ा बिजनेसमैन बन गया है, पैसा, गाड़ी, घर दौलत किसी चीज की कमी नही है जिंदगी मजे में कट रही है।


भोलू ने बताया कि उसका जीवन कठिनाई से चल रहा है। ठेले से ले देकर गुजारा चल रहा है। कुल मिलाकर उसने अपनी गरीबी का रोना रोया।


गोलू ने भोलू को अपना कार्ड देते हुए कहा - 'कल मेरा जन्म दिन है इस पते पर आ जाना, दोनों दोस्त पार्टी इंजॉय करेंगे।'


भोलू ने हाँ मे सिर हिलाया और कहा - 'पार्टी तो यार तुम बड़े लोगों की होती है, हम गरीब लोग कहाँ इंजॉय कर पायेंगे।'


भोलू की बाते सुनकर गोलू ने कुछ विचार करते हुए कहा - ' यदि तुम चाहोगे तो तुम्हारी भी जिंदगी बदल सकती हैं , एक काम करना कल मेरे घर आओगे तो बैग पकड़ कर आना। '


फिर गोलू वहाँ से चला गया ।


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इधर भोलू के मन में लड्डू फूटने लगा...


भोलू तुरंत अपना सायकल उठाकर गोलू के कार्ड मे दिये एड्रेस पर पहुँचा। गोलू का घर कोई घर नहीं बल्कि कई एकड़ में फैला बड़ा और भव्य महल था। महल में पहरेदार और दर्जनों नौकर चाकर काम में लगे थे ।


पूछने पर पता चला कि गोलू के कारखाने देश - विदेश में फैले फैले हैं ।


किसी बड़े लाभ की संभावना के हसीन विचारों में खोये भोलू को उस रात नींद नहीं आई ।


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दूसरे दिन वह गोलू के जन्म दिन की पार्टी में पहुँचा। भोलू ने  उसे बर्थ डे की बधाई और गिफ्ट दिया।



पार्टी समाप्त होने के बाद.. गोलू अपने साथ भोलू को एक कमरे में ले गया पूरा कमरा नोटों की गड्डियों और सोने- चांदी हीरे- मोती जवारात से खचाखच भरा था ।



गोलू ने अपार दौलत की ओर इशारा करते हुए कहा - "भोलू भाई जितना ले जाना है ले जा तू ,,, दस मिनट का समय दे रहा हूं,  बैग तो लाया होगा भर ले। लेकिन दस मिनट के बाद 1 सेकंड भी समय नहीं दूंगा " 



गोलू की बात सुनकर भोलू को एक बार तो विश्वास नहीं हुआ, हालांकि उसे उम्मीद तो थी की कुछ तो मिलने वाला है लेकिन इतनी ज्यादा दौलत की तो उसने कल्पना भी नहीं की थी।


कुछ देर तक हँसता रहा वह इतने धन का क्या क्या उपयोग करेगा इस बारे में सोच रहा था ।


फिर वह महल के बाहर दौड़ा अपने साथ लाये बोर में भरे आठ -दस सूटकेस और बैग लेकर कमरे में वापस लौटा।


अब तक 5 मिनट गुजर चुके थे...


..भोलू ने जल्दी से सभी बैग और सूटकेस को खोला और झटपट जवारतो और गड्डियों को हाथों में उठाया और सूटकेस में डालने वाला था तभी उसने देखा की सूटकेस में धूल जमी हुई है ।


उसे लक्ष्मी जी को ऐसे धूल धक्कड़ के साथ रखना ठीक नहीं लगा और कपड़े से सभी सूटकेस को साफ करने लगा। कुछ बैग के चैन भी ठीक से नहीं लग रहे थे उसे भी ठीक करने लगा।


इस तरह से पांच मिनट और खत्म होने के कगार पर आ गया ।


पास खड़े गोलू ने कहा - भाई तुम्हारा समय खत्म हो रहा है ।


अब भोलू को होश आया कि वह व्यर्थ में समय गंवा रहा है और दौड़कर दो नोट की गड्डी को उठा पाया था कि उसका समय ख़त्म हो गया ।

भोलू का मुँह उतर गया उसने एक मिनट का और समय मांगा लेकिन गोलू अपने शर्त पर अडिग रहा ।


उस दो गड्डी के साथ भोलू कमरे से बाहर निकला...


और बड़े भारी मन के साथ वहा से विदा हुआ।


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अगले दिन भोलू ने पान ठेले पर उन दो गड्डियों से मिले बीस हज़ार रुपये से कुछ और समान भर लिया।


इस तरह भोलू का वही घिसा- पिटा जीवन फिर से चलने लगा।


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सार यह है कि सबसे ज्यादा जरूरी काम को सबसे पहले करना चाहिए बाकी छोटे मोटे काम तो बाद मे भी किये जा सकते है ।


इसी तरह भगवान देवी देवताओं महापुरुषों के द्वारा दी गई सीख- शिक्षाओ को हमे सबसे पहले अपने जीवन में अपनाना चाहिए बाकी उनका पूजा पाठ, महिमागान, जुलुस, यज्ञ, भंडारे इत्यादि तो बाद में भी किया जा सकता है।


अर्थात भगवान की अमृत रूपी सीख का पान सबसे पहले करनी चाहिए बाकी कार्य तो बाद में भी हो सकती है ।


धन्यवाद


🙏🙏🙏🙏






सबसे ज्याद जरूरी काम || Sabse jyada jaruri kam

भोलू हर रोज की तरह अपने पान ठेले पर बैठा पान बना रहा था। उसी समय एक कार आकर ठेले के पास रुका उसमें से सूट पहने एक आदमी गाड़ी के काँच को नीचे ...