बुधवार, 15 सितंबर 2021

हमारे अस्तित्व की प्रकृति क्या हो सकती है? || Hamare Astitva ki prakriti kya ho sakati hai?

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आज से करोड़ो वर्ष पहले मानव जीवन की उत्पत्ति हुई। 

तभी से मानव के अस्तित्व का आरम्भ मांना जाता है। 


             दिए गए प्रश्न की गूढ़ता को देखते हुए मै इसे दो भागो में बाँटना चाहूंगा क्योकि हम मानव अस्तित्व को समझे बिना उसकी प्रकृति को नहीं समझ सकते -

पहला - मानव का अस्तित्व क्या है ?

दूसरा- मानव के अस्तित्व की प्रकृति क्या है ?


मानव का अस्तित्व क्या है?🤔🤔


वास्तव में मानव के अस्तित्व के दो स्वरूप है -


1 . भौतिक स्वरूप -

मानव का भौतिक स्वरूप उसका शरीर है जो हमे दिखाई देता है।


2 . अभौतिक स्वरूप -

 मानव का अभौतिक स्वरूप उसकी आत्मा है जो हमे दिखाई नहीं देती।


कुल मिलाकर 

                   मानव का अस्तित्व उसके भौतिक और अभौतिक स्वरूप का मेल है जिसे हम शरीर और आत्मा के रूप में जानते है।


मानव के अस्तित्व की प्रकृति -

                   अब हम आते है प्रश्न के दूसरे भाग में कि -" मानव के अस्तित्व की प्रकृति क्या है? "

सर्वप्रथम हम जान लेते है कि किसी की प्रकृति क्या हो सकती है। 

एक बिच्छू की स्वभाविक प्रकृति डंक मारने की, वही एक संत की प्रकृति दया भाव की होती है


तब मानव की प्रकृति क्या हो सकती है , मानव की प्रकृति उसकेअस्तित्व के दो स्वरूपों में निहित होती है-

एक

          मानव के भौतिक स्वरूप या शरीर की प्रकृति संसारिक वस्तुओ के प्रति लगाव की होती है। 

           वह आचार विचार व्यवहार सहित सम्पूर्ण माया मोह से बंधा हुआ होता है। अर्थात शरीर की प्रकृति संसार से जुड़े रहने का है।


दो - 

          अभौतिक स्वरूप या आत्मा की प्रकृति संसारिक वस्तुओ , आचार , विचार व्यवहार से पूर्णतः अलगाव की होती है। 

           वह माया मोह के बंधन से बंधा हुआ नहीं होता , यानि आत्मा की प्रकृति निर्विकार होती है।


निष्कर्ष - 


            हम कह सकते है कि चूँकि 


           मानव का अस्तित्व उसके शरीर और आत्मा से मिलकर बना होता है अतः उसके अस्तित्व की प्रकृति उसके शरीर और आत्मा के अनुरूप ही निर्धारित होती है।


धन्यवाद🙏🙏🙏🙏


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गुरुवार, 9 सितंबर 2021

आत्मज्ञान क्या है, इसे कैसे प्राप्त करे? || Aatm gyan kya hai ise kaise prapt kare ?

 सरल दिखने वाले इस प्रश्न का उत्तर जटिल है। मैं आसान ढंग से समझाने की कोशिश करता हूँ।


आत्मज्ञान क्या है -


आत्मज्ञान यानी स्वंय के बारे में सब कुछ जान लेना।


आत्मज्ञान=आत्मपरिचय=कैवल्य=निर्वाण=मोक्ष=ईश्वर प्राप्ति


आत्मज्ञान कैसे प्राप्त करे-


आत्मज्ञान प्राप्त करने के रास्ते निम्नलिखित है-


1.भक्ति द्वारा- ईश्वर के प्रति पूर्णतः समर्पण जैसे तुलसीदास


2. ज्ञान द्वारा- अद्वैत साधना से जैसे शंकराचार्य


3. शून्यता द्वारा- कार्य के कारण को नष्ट कर अंत मे कार्य कारण दोनों न होने पर अज्ञानता नष्ट हो जाएगी और निर्वाण मिलेगा जैसे बुद्ध


4. उच्च नैतिक मूल्यों द्वारा - यह आस्तिक व नास्तिक दोनो के लिए सम्भव है।


5. कर्मवाद या जनसेवा द्वारा - कर्म या जनसेवा निःस्वार्थ होने चाहिए


चित्र द्वारा आप आत्मज्ञान के चरण को भलीभांति समझ सकते है-



ध्यान देने वाली बात यह है कि कैवल्य और निर्वाण में मोक्ष का अर्थ ईश्वर प्राप्ति नही है बल्कि अनंत में लीन होने से है क्योंकि वहाँ भगवान की संकल्पना नही की गई है।


नास्तिक होकर भी आप आत्मज्ञान या मोक्ष प्राप्त कर सकते है इसके लिए शून्यता, नैतिकता एवं निः स्वार्थ कर्म का रास्ता बताया गया है।


साथ ही बिना ईश्वर ध्यान के नैतिकता नही आती है , इस प्रकार के बेकार के बहस में न पड़े क्योंकि....

        ....जापान में अधिकांश नास्तिक धर्म के लोग हैं लेकिन ईमानदारी , देशप्रेम जैसे नैतिकता पूर्ण बातें हम भारतीयों से ज्यादा उनमे कूटकर भरी है।


सारांश यह है कि आत्मज्ञान कैसे प्राप्त करे इसके लिए ऊपर में जो रास्ते बताये गये है उनमें से जो आपको जचता है उसे अपनाये और आत्मज्ञान प्राप्त करे।

धन्यवाद🙏🙏

मंगलवार, 7 सितंबर 2021

तोता और गौरैया | Parrot and Sparrow

समुद्र के किनारे एक तोता और गौरैया रहते थे। दोनो में अच्छी जमती थी इसलिए उनकी दोस्ती हो गई थी।


          एक दिन बातो ही बातो में दोनों समुद्र पार करने की बात करते है।शर्त लगाते है कि जो पहले पार करेगा, उसके लिए एक माह के दाना पानी की व्यवस्था जो हारेगा वह करेगा।

               

              दोनों उड़ान के लिए तैयार हो जाते है, फिर समुद्र की ओर उड़ना आरम्भ कर देते है। शुरू में दोनों बड़े जोशखरोस से उड़ते है। 


              थोड़ी दूर जाने के बाद गौरैया को थकान महसूस होता है, उसे लगता है कि यह उसके बस की बात नही है। वह बगल में उड़ रहे तोता को यह बात बताता है और वापस किनारे की ओर आ जाता है।

               उधर गौरैया को वापस जाते देख तोता बड़ा प्रसन्न होता और एक महीने के मुफ्त भोजन के सपने में खो जाता है। 

                जल्द ही तोता को भी थकान होने लगता है लेकिन वह आगें की ओर उड़ते ही रहता है।

              अंत मे तोता इतना तक जाता है कि उसे चक्कर आने लगा तब वह इधर उधर देखता है कि कही जमीन मिल जाये, लेकिन वहाँ तो केवल पानी ही पानी था।

             अब वह वापस घर जाने की बात सोचता है, पीछे मुड़ता है लेकिन तब तक उसमें इतनी शक्ति नही बची थी कि वापस जा सके और वही समुद्र में गिर कर मर जाता है।


निष्कर्ष -

                यह कहानी हमे बताता है कि किसी भी क्षेत्र में कार्य आरम्भ करने के पहले हमें अपनी विशेषता और कमी की जानकारी प्राप्त कर उसके अनुसार योजना बनानी चाहिए।

                अपनी शारिरिक, मानसिक, तकनीकी एवं आर्थिक क्षमता का विश्लेषण कर हमें उसमे कमी- बेशी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी चाहिए।

                जैसे दोनो पक्षियों ने आसपास से गुजरने वाली जलयान के समय को ध्यान में रखकर उड़ने की बात सोची होती तो शायद वे सफल हो जाते।


क्या यह प्रसंग निराशावादी है?

               कहानी में समुद्र पार करने का निर्णय अचानक लिया गया बिना अपनी क्षमता को ध्यान में रखें , अतः गौरैया अपने उद्देश्य में सफल नहीं हुआ और अपना नुकसान करते हुए उस कार्य को छोड़ना पड़ा। वहीं तोता को इस गलती की कीमत डूबकर चुकानी पड़ती है।

               प्रसंग का उद्देश्य बड़े काम करने के लिए हतोत्साहित करना नही है बल्कि सावधानी रखते हुए इसकी पर्याप्त तैयारी के सम्बंध में सीख देने से है। 

               जोश+पूर्व तैयारी+सटीक रणनीति से हम असम्भव कार्य को भी सम्भव कर सकते है।

धन्यवाद🙏🙏

सबसे ज्याद जरूरी काम || Sabse jyada jaruri kam

भोलू हर रोज की तरह अपने पान ठेले पर बैठा पान बना रहा था। उसी समय एक कार आकर ठेले के पास रुका उसमें से सूट पहने एक आदमी गाड़ी के काँच को नीचे ...