सोमवार, 14 जून 2021

जिंदगी में क्या जोखिम लेने लायक है ? Jindagi me kya jokhim lene layak hai ?

कुछ लोगो को पूछने का बड़ा शौक होता है ,अनोखे -अनोखे सवाल करते है। 


 मुझ से भी किसी ने पूछा कि इस जिंदगी में क्या जोखिम लेने लायक है ?

                मान्यवर जी जिंदगी खुद एक जोखिम है । आप चाहे जोखिम ले न ले , जब तक जिंदगी होगी जोखिम साथ होगा। जिंदगी में जोखिम और हौसले को बयाँ करता हुआ गहरी अर्थ लिए यह चित्र देखे -



...तो मंजिल रुकने का नाम है,


 जिंदगी चलने का। 


 वही जोखिम वह सड़क है ,


 जहां कभी भी कुछ भी हो सकता है।


 अतः हौसला रखना है क्योंकि जोखिम तो साथ रहेगा ही।


 धन्यवाद।।


इन्हे भी देखे : सबसे बड़ा कौन दानी या दान ? 

                 : क्या धर्म के प्रभाव से लोग अनैतिक बन रहे है ?

सबसे बड़ा कौन दानी या दान ? Sabse bda kaun dani ya dan ?

                 प्राचीन काल से ही दान की महत्ता का उल्लेख होता आया है। ग्रंथो किस्से कहानियों से होते हुए वर्तमान मे भी हमे कई दानवीर मिल जाएंगे। कुछ लोग प्रश्न उठाते है कि दानी बड़ा है या दान करने का काम बड़ा है। आइये यह जानने का प्रयास करते है। 

दरअसल दान की क्रिया को सम्पन्न करने के लिए तीन चीजो की आवश्यकता होती है-

दानदाता या दानी

2 दान प्राप्तकर्ता

3 दान की गई वस्तु -इसका रूप भौतिक या अभौतिक हो सकता है




दानदाता की स्थिति -

                               सर्वप्रथम दानी के मन में दान करने की भावना का संचार होगा फिर वह दान प्राप्तकर्ता को दान करता है। यदि दानदाता हो लेकिन दान प्राप्तकर्ता या दान की वस्तु न हो तो दान की क्रिया पूर्ण नही हो पाएगी। फिर भी दानदाता के मन मे दान करने की उठी भावना की अवश्य प्रशंसा होनी चाहिए।


दान की स्थिति-  

                               दान पूर्ण करने के लिए दानी , दान प्राप्तकर्ता एवं वस्तु की आवश्यकता होगी, किसी भी एक के बिना दान पूरा नहीं होगा।



दानी एवं दान की तुलनात्मक स्थिति -

                                दान जो अपने आप मे एक पवित्र काम माना गया है, बिना दानी के अधूरा है। वास्तव में दान और दानी एक दूसरे के लिए कार्य-कारण दोनों है, एक के अस्तित्व के बिना दूसरे की संकल्पना नही की जा सकती।


               फिर कौन बड़ा है ये कैसे जाने। देखिये दानी, दान प्राप्तकर्ता और वस्तु तीनो नाशवान है और एक भी नष्ट हुआ तो दान की प्रक्रिया पूर्ण नही होगी। तो दानी और दान दोनो बड़ा नही है उससे भी बड़ा है दान करने की पवित्र भावना जो दान पूर्ण न होने पर भी विद्यमान रहती है।


              संक्षेप में कहे तो दान किसी व्यक्ति के निःस्वार्थ सहयोग करने के विचार का व्यवहारिक रूप है तब सहयोगकर्ता एवं सहयोग के इस कार्य में से किसी एक को बड़ा कैसे कहेंगे अतः सहयोग का विचार ही महान है।

धन्यवाद।

क्या धर्म के प्रभाव से लोग अनैतिक बन रहे है ? | Kya dharm ke prabhav se log anaitik ho rhe hai ?

एक विद्वान ने धर्म का बड़ा सुंदर परिभाषा दिया है, उसके अनुसार-


              धर्म वह चीज है जिसे धारण किये बिना आप जिन्दा नहीं रह सकते। अर्थात सरल ढंग से समझे तो कोई व्यक्ति को अपने काम के प्रति इतना लगाव हो कि वह उसके बिना जी नहीं पाए तो वह काम ही उस व्यक्ति के लिए उसका धर्म है ।



               उसने धर्म को भगवान या अध्यात्म से भी अलग बताया, खैर इस पर अलग से चर्चा हो सकती है। लेकिन मैं उसके इस बात से जरूर सहमत हूँ कि धर्म आप के अंदर उस वस्तु को जरूर खोजती है जो आपको जिन्दा रहने को प्रेरित करती है।


अब अनैतिक बनाने संबंधी प्रश्न में आता हूँ,


                जब धर्म से हमे जीवन संबंधी प्रेरणा मिल रही है तो धर्म हमे कैसे अनैतिक बना सकता है।



                 वही जिसे दुनिया धर्म मानती है यानि हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई आदि के संदर्भ में देखे तब भी धर्म लोगो को अनैतिक नहीं बनाती बल्कि धर्म के ठेकेदारों द्वारा धर्म की गलत व्याख्या लोगो को अनैतिक आचरण अपनाने को प्रेरित करती है।


 धर्म अपने आप में बुरा नहीं है,

                  कहते है कि दुनिया में समझदार लोगो की कमी है, कुछ तो इसकी संख्या केवल 5 % बताते है, तब हम यह क्यों न माने कि लोग बड़ी संख्या में धर्म को गलत ढंग से समझेंगे और उसके अनुरूप अनैतिक कार्य करेंगे क्योंकि धर्म को कलिष्ट विषय बना दिया गया है जो आम जनमानस के समझ से ऊपर की बात प्रतीत होती है।


                इस गलतफहमी के कारण लोग पथभ्रष्ट होकर कई बुराइयों में संलग्न हो जाते है, जो कि समाज में अलगाववाद, सम्प्रदायवाद, आतंकवाद, भाषायी संघर्ष व दंगो के रूप में परिलक्षित होती है।

धन्यवाद।

रविवार, 13 जून 2021

क्या होगा यदि इंट्राडे में ख़रीदे शेयर दिन के अंत तक ना बिके || what happens if intraday shares are not sold in hindi

                    शेयर मार्केट में एक ही दिन में शेयर की खरीदी बिक्री से मुनाफा जल्द प्राप्त हो जाने के कारण इंट्राडे आज काफी चलन में है।


इंट्राडे में शेयर खरीदी बिक्री दो मोड या तरीके से होता है,


पहला ब्रोकर के माध्यम से 

दूसरा स्वयं  के व्यय से ,


                   दोनों तरीको में शेयर की खरीदी बिक्री दिन के अंत तक पूर्ण करनी होती है लेकिन यदि ऐसा ना हो पाए तो क्या होगा ?



 यह एक बड़ा प्रश्न है आइये इसका जवाब ढूंढते है। 


पहली स्थिति- 

                   यदि आपने bye कर intraday किया और शेयर में लोवर सर्किट लग गया तब आप sell नही कर पाएंगे। ब्रोकर भी 3:15 बजे तक आपका पोजीशन कट नही कर पायेगा , तब शेयर आपके a/c में रहेगा जिसक पैसा ब्रोकर ने दिया है ।


                  अब यदि कई दिनों तक लगातार लोवर सर्किट रह जाये तो शेयर बिकेगा नही फिर ब्रोकर आपसे शेयर के पैसे की मांग कर सकता और यदि खरीदे गए शेयर काफी मूल्य का है तो आपका बहुत सा पैसा इसी में फंसेगा।





दूसरी स्थिति - 

                     आपने intraday में sell ऑर्डर लगाया यानि short कर रहे है तब यदि स्टॉक में अपर सर्किट लग जाए तो आप bye नही कर पाएंगे , ब्रोकर भी आपकी पोजीशन कट नही कर पायेगा। चूंकि आपने तो sell ऑर्डर कर शुरू में ही शेयर बेंच दिया है इसलिए आपके या ब्रोकर के एकाउंट में यह शेयर नही रहेगा।


                    इसमे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपने जिसे शेयर बेचा है उसे +2days में भी शेयर नही मिलेगा क्योंकि आप तो शेयर खरीद ही नही पाये। जबकि जिसे आप ने बेचा उसको शेयर मिलना चाहिए यह तो उसका अधिकार है।


                    कई दिनों की अपर सर्किट आपकी मुसीबत और बढ़ाएगी, ऐसी स्थिति में सेबी सख्त है वह फाइन भी लगाती है। एक मित्र के अनुसार ऐसी भूल के लिए सेबी ने उसके भाई को 2 लाख रूपये का जुर्माना लगाया था। 



निष्कर्ष -


                    intraday में यदि bye कर रहे है तो लोअर सर्किट न लगे , वही sell कर रहे है तो अपर सर्किट न लगे इसको ध्यान में रखना जरूरी है। 



                     इससे बचने के लिए अधिक वॉल्यूम वाले शेयर में जाये और न्यूज़ पर नजर रखने के आलावा और भी कई सारी सावधानी रखनी पड़ती है।


धन्यवाद। 

 


कैसे करे शेयर मार्केट में अपने निवेश का प्रबंधन || share market me investing managment kaise kare?

निवेश प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य अधिक लाभ अर्जन के साथ जोखिम को कम करना होता है। 


                आमतौर पर निवेश करने से तात्पर्य शेयर बाजार में निवेश करने से लगाया जाता है, इसीतरह निवेश प्रबंधन भी शेयर बाजार में निवेश प्रबंधन से समझा जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है निवेश प्रबंधन के कई आयाम है।





निवेश को क्षेत्रवार बाँटना -


              एक आदर्श निवेश प्रबन्धन के अनुसार हमे अपनी कुल राशि या इन्वेस्टमेन्ट को कई भागों में बांटकर शेयर बाजार सहित नीचे दिए गए क्षेत्रो में निवेश करने चाहिए-


1 .शेयर बाज़ार में - आगे इस पर चर्चा करेंगे। 


2 .म्यूचुअल फंड में - क्योंकि जब लोग शेयर बाजार की अनिश्चितता के कारण यहाँ शिफ्ट होने लगे तब हमें लाभ मिले।


3 .बांड में - खासकर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में, लोग शेयर बाजार से बांड में भी आते है जब शेयर बाजार महंगा हो।


4 .कॉमोडिटी मार्केट में- तेल,डॉलर,सोने में।


5 .फिक्स डिपॉजिट में - काफी सारे शेयर बाजार निवेशक फिक्स डिपॉजिट से नाक भौ सिकोड़ने लगते हैं लेकिन यह आपके लिए एक इंश्योरेंस की तरह है जब शेयर बाजार में बड़ा क्रैश आये तब इसका उपयोग कर सस्ते में स्ट्रांग कम्पनी के शेयर बड़ी संख्या में खरीद सकते है जैसे 2020 के कोरोना लॉक डाउन में। 


6.रियल एस्टेट में - खुद का जमीन लेकर घर बनाना ज्यादा फायदेमंद है किसी बड़ी बिल्डिंग में फ्लैट लेने की अपेक्षा। 




शेयर बाजार में निवेश प्रबन्धन जब आप अत्यधिक लाभ में हो -


  • यदि लाभ स्ट्रांग शेयर में हो और उसका बिजनेस मॉडल ऐसा है कि आने वाले कई वर्षों तक कम्पनी तेजी से ऊपर जा सकती है तो ऐसे शेयर न बेचे अन्यथा एग्जिट कर सकते है।
  • जब मार्केट ऊपर हो तब कम निवेश करे। 
  • अभी मई जून 2021 में बाजार काफी ऊपर है जिसमे कई कमजोर कम्पनी भी ऊपर भाग गए है चाहे तो इसमें एग्जिट करे



  • बबल वाले स्टॉक से जिनका रिजल्ट खराब लेकिन शेयर भाग रहे है, इससे एग्जिट कर सकते है
  • एग्जिट किये गए स्टॉक के पैसे का एक हिस्सा को सेविंग या fd करे ताकि क्रैश में काम आये
  • एक हिस्से को उन स्ट्रांग शेयर में लगाये जो अभी नीचे लेवल पर है
  • पेनी शेयर और घटिया स्टॉक से पीछा छुड़ाने के यह समय अच्छा होता है
  • अत्यधिक लाभ की स्थिति में एग्जिट का एक हिस्सा गोल्ड पर भी लगा सकते है
  • कुछ लोग अत्यधिक लाभ की स्थिति में सभी शेयर को बेच देते हैं , वही कुछ लोग मार्केट ऊपर होने के कारण निवेश करना बंद कर देते है , यह दोनों काम नही करना है। क्योंकि मार्केट कितना ऊपर या नीचे जाएगा कोई नही जानता।


 प्रबन्धन जब आप नुकसान में हो 


➡ पहला कार्य तो यही करना है कि क्यो नुकसान हुआ , कैसे हुआ , कारण क्या था आपसे गलती कहाँ हुई, इसका अध्ययन करना है और आगे बढ़ना है। 


➡साथ ही किसी स्टॉक के नीचे आने का कारण देखिये यदि बाह्य कारण से कम्पनी नीचे आई है तो होल्ड करे वही आंतरिक कमजोरी है तो देखे की क्या उस कमजोरी में इतना दम है कि कम्पनी उससे उबर नही पाएगी,इसी आधार पर निर्णय ले।


➡यदि आपको नुकसान हो रहा है लेकिन आपने एग्जिट नहीं किया है तो देखिये कि क्या कम्पनी स्ट्रांग है उसका बिजनेस ऊपर आ सकता है तो होल्ड कीजिए। 


➡कमजोर कम्पनी में नुकसान हुआ तो भी एग्जिट कर सकते है।


➡नुकसान से बचने के लिए क्या आपने स्टॉक को डाइवर्सिफाइड किया था यानि अलग अलग सेक्टर में राशि को बाँटकर लगाया था , सामान्यतः10 % से अधिक राशि एक शेयर या सेक्टर में नही लगाया जाता , यदि ऐसा नही किया था तो अब करे।


➡यदि पूरा मार्केट गिरने के कारण आपको नुकसान हो रहा है तो घबराये नही यह कंपनी की खराबी नही है बाद में मार्केट ऊपर जाएगा।


➡अगर मार्केट नीचे है तो सस्ते में अच्छा शेयर पाने का अच्छा मौका है निवेश बढ़ा देना चाहिए लेकिन निवेश एक साथ न कर sip मोड में यानि थोड़ी थोड़ी मात्रा में 20 -20%की गिरावट में करे।


➡यहाँ वहाँ से टिप लेकर tv मोबाइल यूट्यूबमें देखकर या सुनकर निवेश से नुकसान हो सकता है खुद सीख कर निवेश करें।


➡नुकसान होने पर कुछ लोग कर्ज या लोन लेकर या अपने महीने की पूरी कमाई को शेयर बाजार में लगाने लगते है ऐसा निवेश खतरनाक है। 



कुल मिलाकर निवेश प्रबंधन व्यक्ति को शेयर बाज़ार में नुकसान से बचाती है , लाभ भले हो न हो लेकिन पोर्टफोलियो को सुरक्षित जरूर रखती है।


नोट-इस लेख के आधार पर शेयर बाजार में अपने निवेश सम्बन्धी निर्णय न ले, खुद रिसर्च कर या अपने फाइनेंस एडवाइजर से सलाह कर निवेश करें।


धन्यवाद🙏🙏

सबसे ज्याद जरूरी काम || Sabse jyada jaruri kam

भोलू हर रोज की तरह अपने पान ठेले पर बैठा पान बना रहा था। उसी समय एक कार आकर ठेले के पास रुका उसमें से सूट पहने एक आदमी गाड़ी के काँच को नीचे ...