✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
बात ब्रिटिश काल की है।
किसी इलाके में उस समय खूब अकाल पड़ते थे,,
लेकिन मालगुजारो के घर मे कोई कमी नही थी क्योंकि कुओं और नहर के पानी पर उसका अधिकार था।
*केउ* अपनी पत्नी *मेउ* के साथ एक मालगुजार के घर मे गेहूँ मिजाई के लिए गया था ,,
काम क्या वह तो बेगारी थी, मजदूरी में उसे एक पैसा तक मिलने वाला नही था।
खैर काम खत्म कर केउ *मालगुजार* के पास पहुंचा और गेहूँ की सफाई के बाद निकले भूसे- कंकड़ को ले जाने की अनुमति मांगी।
काफी मिन्नतों के बाद मालगुजार ने एहसान दिखाते हुए केवल दो टोकरी भूसा ले जाने की इजाजत दी।
असल मे भूसे कंकड़ के ढेर में गेहूँ के कुछ टूटे दाने या खोखले घुन लगे दाने निकल आते थे,, अतः केउ -मेउ खुश थे कि आखिर कुछ तो मिला।
अगले दिन तहसील में सभी मालगुजारों को सालाना हिसाब करना था,,, मालगुजार ने इसके लिए अपने छोटे भाई( *छोटे साहब* ) को भेजा,, शाम को तहसीली से हिसाब किताब करके लौटते समय उसके ऊपर डकैतों ने हमला कर दिया।
कमीशन में मिले रुपयों की दो बक्सों में एक को डकैत ले गये। दूसरे को छोटे साहब लेकर भागे लेकिन डकैतों ने गोली चला दी,,,
लहुलुहान होने पर भी छोटे साहब किसी तरह भाग निकले।
आधी रात हो चुके थे, छोटे साहब अभी गाँव के पास पहुँचा ही था कि पास के घर मे सहायता मांगते समय वह बेहोश हो गये।
संयोग से यह घर केउ - मेउ का था , उसने उसे तुरंत घर के अंदर ले आये, रुपये का बक्सा घर मे रखा और गाँव के कोतवाल को बुला लाया उसने मालगुजार के घर सूचना भेजी।
तुरंत छोटे साहब को इलाज के लिए शहर ले जाया गया, उसका प्राण बच गया, साथ रुपयों का बक्सा केउ ने मालगुजार को सौप दिया ।
अब तक आप सोच रहे होंगे कि यह तो *एक टिपिकल अच्छे गरीब और अत्याचारी अमीर की कहानी है*
जिसमे धनवान, गरीब का शोषण करता है, लेकिन गरीब उसका भला करता है और फिर धनी को सबक मिल जाता है ,, जिसके बाद बेचारे निर्धन व्यक्ति का दुःख दर्द खत्म हो जाता है...
... *तो कहानी बिल्कुल ऐसी नही है,,, तो आगे पढिये क्या होता है??*
🖼️🖼️🖼️🖼️🖼️🖼️🖼️
अगले दिन पुलिस ने घटना की जाँच की केउ के घर भी आया थोड़ी पूछताछ के बाद चला गया।
उसके साथ आये मालगुजार से डरते हुए केउ ने छोटे साहब की जान बचाने की खुशी में कुछ इनाम देने की बात की।
तब मालगुजार ने उसे *हड़काते* हुए कहा शुक्र करो की तुम्हे पुलिस पकड़कर नही ले गया, कही तुम भी डकैतों से मिले हुए तो नही हो, तभी तुम्हारे घर से मेरे भाई घायल होकर मिला।
यह सुनकर केउ घबरा गया और डर के मारे हाथ पाव जोड़ने लगा।
आगे मालगुजार ने कहा चलो थोड़ी देर के लिए मान भी लेते है कि तुम डाकुओं से नही मिले हो तब भी तुम्हारे घर के सामने कोई घायल हो जाये तो सहायता करना तो तुम्हारा फर्ज है।
.... तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हारे जैसे लोगो को हमारी सेवा करने का अवसर मिला।
यह कहकर अंत में मालगुजार अपने घर जाने के लिए तांगे में सवार हुआ ,,फिर न जाने क्या सोचा , केउ को आवाज देकर पास बुलाया और उससे कहा-
*" ठीक है कल घर आ जाना और इनाम के तौर पर दो टोकरी भूसा ले जाना।"*
तो प्रिय पाठकगण *जिस तरह हर कहानी का हैप्पीएण्ड नही होता ,, वैसे ही किसी का भलाई करने में हमेशा आपको सम्मान मिलेगा जरूरी नहीं है।*
कभी -कभी भलाई करने में भी सामने वाले से आपको बुराई या अपमान भी मिलेगा।
धन्यवाद।।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
.jpg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें