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एक विद्यार्थी यदि गणित का कोई सवाल बना लेता है तो वह जान जाता है कि यदि वह इसीतरह कोशिश करे तो आगे के भी सवाल बना लेगा,,,
क्योकि आगे के सवाल को हल करने के लिए जो आवश्यक दक्षता थी, उसे उसने पिछले चैप्टर से हासिल कर लिया है,,,
जिसके कारण उसके मन में आगे की सम्भावना के प्रति एक सकारात्मक विश्वास पैदा होता है इस सकारात्मक विश्वास को ही *आत्मविश्वास* कहते है।
यही चीज ज्यो का त्यों पैसे के बारे में भी लागू होता है, व्यक्ति के पास जैसे- जैसे पैसा आते जाता है वह पैसे कमाने के दांव पेंच से भलीभांति वाकिफ हो रहा होता है अतः उसका विश्वास भी बढते जाता है।
साथ ही *पैसा कमाने* से व्यक्ति पैसे की ताकत को भी जान जाता है कि वह पैसे का उपयोग कर काफी सारी विपरीत परिस्थितियों को अपने अनुकूल कर लेगा अतः उसका आत्मविश्वास बढ़ जाता है।
वही पर कमजोर व्यक्तित्व वाला व्यक्ति पैसा कमाने पर आत्मविश्वास को अत्यधिक बढ़ा हुआ महसूस करता है जो कि अतिआत्मविश्वास या *ओवरकांफिडेन्स* कहलाता है।
स्पष्ट है कि आप जिस क्षेत्र में कॉन्फिडेंट होना चाहते हैं उस क्षेत्र की बेसिक जानकारी ही आपका आत्मविश्वास बढायेगा,,
अन्यथा आप छोटी छोटी चीजों के लिए भी दूसरों का मुँह ताकते रहेंगे।
धन्यवाद।
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