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स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि-
' *गीता पढ़ने के पहले दो घण्टे फुटबॉल खेलो'*
उनके कथन के पीछे उद्देश्य यह था कि जब व्यक्ति का शरीर खेल और व्यायाम के द्वारा स्वस्थ्य रहता है तब उसका दिमाग भी तीव्रता से चीजों को ग्रहण करता है।
इसलिए जब गम्भीर किस्म के बातों को समझना होता है तब आपने भी महसूस किया होगा कि हम उस समय जितना एकाग्र होते है उसे उतनी जल्दी समझ लेते हैं।
प्रस्तुत कथन में गीता पढ़ने को एक विवेकानंद जी ने एक उदाहरण के रूप में दर्शाया है,, जरूरी नही है कि आप गीता ही पढ़े।
आप अपने धर्म- पंथ या विश्वास के आधार पर कोई भी ग्रंथ पढ़ सकते हो,, या कोई दूसरे जरूरी कार्य के सम्बंध में भी इस उदाहरण का प्रयोग कर सकते है।
निष्कर्ष के रूप में हम कह सकते है कि वैसे तो हमे नियमित रूप से व्यायाम करने चाहिए ...
...लेकिन कम से कम उस अवधि में अपने तन और मन को अवश्य तन्दरुस्त रखने चाहिए जो दिन हमारे लिए बहुत ज्यादा महत्व का हो,,
अन्यथा हमारा काम उस स्तर पर पूर्ण नही हो पायेगा जिस स्तर पर हम उसे करना या समझना चाहते थे।
धन्यवाद।।
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