युद्ध का समय निकट था,
काफी लंबे समय से अस्त्र के अभाव से जूझ रही सेना के लिए सैकड़ो लोहार और उनके सहयोगी हथियार बनाने में जुटे थे।
राजा की आज्ञा थी, अतः काम दिन- रात धडल्ले से चल रहा था,,
लोहार धौकनी से भट्ठे में कोयला दगाता , लोहे को गर्म कर तलवार बनाता पानी में डुबाकर ठंडे करता।
अंततः लोहारो का काम पूरा हुआ और हथियार सेना को सौप दी गई।
वैसे दुश्मन सेना छोटी थी इसलिए उत्साह से भरी राजा की सेना शत्रुओं पर टूट पड़ी।
लेकिन थोड़े ही अंतराल में राजा की सेना हर जगह एक- एक करके हारने लगी।
हार से राजा को नगर छोड़कर भागना पड़ा और पड़ोसी मित्र राज्य में शरण लेनी पड़ी।
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बाद में राजा ने ठंडे दिमाग से हार के कारणों की समीक्षा की और उसमें कमी-बेशी को दुरुस्त किया।
फिर राजा ने मित्र राज्य के सहयोग से अपने राज्य में आक्रामण कर दुश्मन को परास्त कर दिया और पुनः सत्ता प्राप्त कर लिया।
क्या कारण था कि राजा पहले के युद्ध में हार गया था और बाद में किस चीज मे सुधार किया जिससे वह जीत गया।
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दरअसल सेना के लिए हथियार जल्द बाजी में बनाया गया था,,,
हथियार बनाने में तकनीकी खामी थी,,
...समय की कमी के कारण लोहार हथियार बनाने के दौरान उसे अपने आप ठंडा नही कर सीधे पानी मे डुबाकर ठंडा करते जिससे सभी हथियार कमजोर बने थे।
यही कारण था कि लड़ाई के दौरान अधिकतर सैनिकों के हथियार टूट गए और उनकी हार हुई।
*सार यह है कि राजा के समान बड़ी सेना,अनुभव, धन,रणनीति, उत्साह इत्यादि से ही आप युद्ध रूपी भंवर से पार नही हो सकते साथ में आपको बेहतर तकनीकी ज्ञान की भी आवश्यकता होती है।*
धन्यवाद।
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