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देखिए मोगली का तो मुझे पता नही लेकिन जो सच है मैं उसे बता रहा हूँ-
एक दिन मैं शाम को टहलने गाँव के बाहर गया था,,
वापसी के समय,
भेड़ो की झुंड सामने आ गई,,
मैंने सोचा इस झुंड को जाने दो फिर मैं बाद में चला जाऊंगा,,,,ताकि धूल धक्कड़ से बच जाऊ।
यह विचार कर मैं पास के शनिमंदिर में चला गया ।
चूंकि भेड़ काफी धीमे चल रहे थे इसलिए अभी भी वे मुझसे कोई खास दूर नही गये थे।
अब मैंने जल्दी -जल्दी चलकर उसे क्रॉस करने की ठानी तभी मैंने देखा कि...
भेड़ो के झुंड के आगे एक बकरी चल रही है।
मैंने इस बारे में चरवाहे से पूछा जो कि मेरा पड़ोसी है उसने बताया कि --
" उस बकरी को जन्म देने वाली बकरी यानि उसकी माता उसके जन्म के बाद गुजर गई जिसके बाद वह भेड़ का दूध पीकर बड़ा हुआ"
इसलिए वह भेड़ की टोली के साथ रहता है,, वह इकलौती बकरी है जो उस टोली के साथ चलती है।
मजेदार बात यह है कि वह अब बड़ा होने के बाद भी बकरियों की टोली के साथ चरने नही जाता ।
खैर कुछ लोग कह सकते है कि भेड़ और बकरी लगभग समान प्रजाति, आदत, खानपान, प्रवृत्ति के जानवर है।
इसलिए वह बकरी, इन भेड़ो के साथ है ,, मोगली और वुल्फ से उसकी तुलना नहीं हो सकती।
बात एकदम सही है, लेकिन दूसरे व्यू से देखे तो समान प्रजाति के होने के बाद भी इंसान ही इंसान का दुश्मन बना बैठा है,,,
तब इन भेड़- बकरियों की आपसी लगाव और आत्मीयता से सबक लेने में क्या बुराई है?
धन्यवाद।।
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