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किसी व्यक्ति, वस्तु या विषय के बारे में पहले से ही राय /जजमेंट बना लेना की वह बुरा है या अच्छा है,,,, यह पूर्वाग्रह कहलाता है।
मान लो A यदि B को बिना अच्छे से जाने उसके बारे में पहले से ही राय या मत बना चुका है कि B घमंडी है, तो B में लाख अच्छाइयां हो, उसे A मित्र के रूप में कभी स्वीकार नही करेगा।
पूर्वाग्रह से ग्रसित व्यक्ति को पूर्वाग्रही कहते है। पूर्वाग्रही का मन मिथको को सही मानता है ,,, काफी लोग इन मिथको के जाल में फंसे होते है।
आइये चित्र में देखते है कि लोग पूर्वाग्रहों में लिप्त होते है -
पूर्वाग्रह हमे नई राह नए पथ में जाने से भी रोकती है क्योंकि उसके बारे में हम पहले ही भ्रमपूर्ण मत बना चुके होते हैं।
कई बार नए राह में जाना जब बहुत आवश्यक हो जाता है तब हमारा आत्मविश्वास उस राह की द्वार को खोलना चाहता है लेकिन पूर्वाग्रह उसे बन्द रखना चाहता है।
कृपया संलग्न चित्र देखे।
दरअसल पूर्वाग्रह पहले से मन बसे पूर्व आधार रहित ज्ञान से निर्मित डर ,संकोच, झिझक के कारण नई राह से दूर रहना चाहता है ,,वही आत्मविश्वास आपकी पॉज़िटिवनेस से ही उद्दीप्त होती है।
सार यह है जिस व्यक्ति में जो चीज ज्यादा होती है वह उसी के अनुसार ढल जाता है।
अर्थात आत्मविश्वास से युक्त व्यक्ति नित नई राह -नई मंजिल -नए विचार की ओर बढ़ता जाता है,,,,
,,,,,वही पूर्वाग्रही व्यक्ति संकीर्ण विचारधारा से अपने राह और अपनी जिंदगी को सीमित कर लेता है। फिर वह जहाँ था वही खड़ा रह जाता है।
धन्यवाद।।
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