सोमवार, 31 जनवरी 2022

अंतिम नुकसान किसे होता है? || Antim nuksan kise hota hai?

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सड़क बनाने का कार्य चल रहा था,,, रोज की तरह काम समाप्त होने के बाद ड्राइवरो ने रोड रोलर, और दूसरे सड़क बनाने वाली गाड़ियों को सड़क के नीचे ला खड़ा किया।



संयोग से उस रात भारी बारिश हुई और सभी गाड़ियां वही फँस गई। ठेकेदार की जेसीबी कही दूसरे शहर में  काम मे व्यस्त था,,,



वही सड़क निर्माण कार्य अंतिम चरण में था,, जल्द काम खत्म करने थे इसलिए  आसपास के गाँवो से दर्जन भर ट्रैक्टर मंगाया गया।



ट्रैक्टर वालो ने कुछ घंटो की मशक्कत के बाद फँसे हुए सभी गाड़ियों को बाहर निकाल दिया।



सुपरवाइजर ने ट्रैक्टर वालो को भुगतान किया,, लेकिन ट्रैक्टर वाले मनमाना चार्ज वसूल रहे थे,, जो सामान्य से कई  गुना अधिक था।



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असल मे सड़क ठेकेदार के गाड़ियों को बाहर निकालने के पहले ही सभी गाँव वाले एकमत हो गये थे कि चूँकि ठेकेदार घटिया रोड बनाते है इसलिए इनसे मनमानी कीमत वसूली जाये।



अब भुगतान में विवाद बढ़ता देख सभी गाँव वाले भी ट्रैक्टर वालो के समर्थन में आ गये,, मामला बिगड़ न जाये इसलिए,,



सुपरवाइजर ने ठेकेदार को फोन लगाया , ठेकेदार ने ट्रैक्टर वालो के मन मुताबिक भुगतान देने को कहा।



भुगतान होने के बाद ट्रैक्टर वालो सहित सभी गाँव वाले जीत की खुशी में सीना फुलाते चले गए कि एक लूटेरे को उन्होंने लूट लिया।






थोड़ी देर बाद सुपरवाइजर को ठेकेदार का फोन आया जिसमे उसने निर्देश दिया कि अंतिम बचे हुए तीन किलोमीटर सड़क बनाने में जो सामग्री लगेगी उसका क्वालिटी उतने रुपये कम कर दो जितने का भुगतान ट्रैक्टर वालो को किया गया है।



यानी ठेकेदार ने ट्रैक्टर वालो के चार्ज की वसूली रोड को घटिया बनाकर कर ली।



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तातपर्य यह है कि *जितने भी घपलेबाजी के काम होते है उसमें अंतिम नुकसान आम जनता का ही होता है।



इससे कभी भी किसी नेता, ठेकेदार, अफसर, कर्मचारी या जनप्रतिनिधियों को कोई खास फर्क नहीं पड़ता।



जैसे -

       स्वास्थ्य विभाग में घपले से अंतिम नुकसान *मरीजो* को, शिक्षा विभाग में अन्तिम नुकसान *बच्चों* को, राजस्व व पंचायत विभाग में अंतिम नुकसान *किसानों और गरीबों* को होता है।



 *इस प्रसंग में भी अंतिम नुकसान गाँव की आम जनता को हुआ* क्योंकि घटिया क्वालिटी से बनी सड़क जो पहले चार पांच सालों में खराब होती थी,,,

...............वह *इस बार साल डेढ़ साल में खराब हो गई।* 



धन्यवाद।।


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