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रोज भारी भरकम बोझा ढोने वाले मजदूर को एक दिन भूसे से भरी बोरी को मालिक के घर ले जाना था।
बोरा हल्का होने के कारण मजदूर तेजी से चल रहा था ,,
पीछे- पीछे बोरे का मालिक और उसका मित्र भी था ,, जो लगातार पीछे और पीछे होते जा रहे थे।
एकाएक मालिक ने मजदूर से कहा 'बोरे में केवल भूसी ही नही कई किलो सोना भी है,, सावधानी से ले चलो'
इतना सुनते ही मजदूर की गति कम होती गई,,लेकिन कुछ समय बाद में उसकी गति इतनी धीमी हो गई कि बोरी मुश्किल से घर तक पहुचाई।
मित्र ने मालिक से पूछा ' मजदूर के द्वारा बोरा लादने के बाद बोरे का वजन तो उतना ही था चाहे भूसी हो या सोना फिर मजदूर थककर धीमा क्यो हो गया'
मालिक ने कहा -' मित्र आप मेरे साथ ही तो थे,,, तो क्यो ना आप खुद विचार करे कि मजदूर धीमा क्यो हो गया........।
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.......असल मे मजदूर के काफी तेज चलने से मालिक उसके साथ नही चल पा रहा था,,
इसलिए उसने जानबूझकर झूठ बोला कि बोरे में सोना है ताकि मजदूर धीरे चले ,,, जिसे सुनकर पहले तो मजदूर हड़बड़ा गया और धीरे चलने लगा फिर उसके धीमे होने से मालिक भी साथ चलने लगा।
अब मजदूर की मनो स्थिति देखते है,, मालिक ने जैसे ही कहा कि बोरे में भूसी के साथ सोना भी है, सावधानी से ले चलो ,,, तो आरम्भ में मजदूर ने मालिक की बात मानते हुए बोर के समान को कोई नुकसान न हो इसलिए धीरे चला ।
लेकिन बाद में उसके मन मे यह विचार आने लगा कि उसने सिर में लाखों रुपये की सम्पत्ति लदी हुई है जिसे वह कभी प्राप्त नही कर सकता।
मजदूर सोचने लगा कि उसे केवल चंद रुपये मजदूरी के मिलेंगे,, लेकिन यदि वह बोरे को लेकर भाग जाता है तो लाखों रुपये मिल जाएंगे ....
यानि अब उसके शरीर के साथ उसका मन भी थकने लगा जबकि बोरे में केवल भूसा है, सोना तो है ही नहीं
लेकिन मजदूर के शरीर को भूसे और सोने दोनो का भार महसूस हो रहा था,, वही उसके मन को सोने के भौतिक भार से ज्यादा उसका मूल्यात्मक भार परेशान कर रहा था।
इसी उधेड़बुन में फंसे होने के कारण उसकी गति बहुत धीमी हो जाती है लेकिन चोरी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता और बोरी मुश्किल से घर तक ले पहुंचाता है।
....तो इसतरह कुछ देर विचार करने के बाद मालिक के मित्र को कारण समझ मे आ जाता है।
धन्यवाद।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
well done 👍👍👍👍👍
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