सोमवार, 17 जनवरी 2022

एक ही थीम पर आधारित लघुकथाएँ || Ek hi thim par aadharit Laghukathaye

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                                           1️⃣ पहला


एक ईगल कनाडा में उठी शीत लहर के साथ उड़ान भरते हुए अमेरिका आदि को पार करते हुए दक्षिण अमेरिका के अंतिम छोर में पहुंच जाता।


आगे महासागर था,, वहां पर एक दूसरा ईगल उसे आगे दरिया होने की बात बताते हुए उसे वापस मुड़ने के लिए कहता है।


लेकिन ईगल जमीन की ओर वापस नहीं उड़ पाता ,, इसका कारण वह बताता है कि -


...... चूँकि महीनों तक हवा की दिशा में उड़ने के कारण अब उसमें विपरीत दिशा में उड़ने की क्षमता नही है।* 



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एक ही थीम पर आधारित लघुकथाएँ || Ek hi thim par aadharit Laghukathaye



                                          2️⃣ दूसरा


एक एम्प्लॉई जो इनकम टैक्स विभाग में कार्यरत था, अच्छे परफॉर्मेंस के चलते बेस्ट एम्प्लॉई का पुरस्कार पाता है।


लेकिन कुछ समय बाद ऑफिस में नये बॉस के आने से स्थिति बदली और वे सभी भ्रष्ट व्यवस्था को समर्पित हो गये।



कई सालों तक यह खेल चला ,, अंततः एक बार फिर ऑफिस में परिस्थितियां बदली,  जब कोई दूसरा व्यक्ति बॉस बनकर आया और भ्रष्ट व्यवस्था समाप्त हुई।


लेकिन बेस्ट एम्प्लॉई का अवार्ड पा चुके शख्स के काम से असंतुष्ट होकर बॉस ने उसे फटकारा,,


तब उसने अपना दुखड़ा सुनाया कि-


 असल में *वह कई साल से रोज रिश्वत लेकर काम कर रहा है,,, इसलिए वह भूल चुका है कि बिना रिश्वत के कैसे काम किया जाता है??* 🤔🤔🙂


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                                         3️⃣ तीसरा


एक बार मीठे पानी यानी नदी की मछली जब समुद्र में चले जाती है, तो वहां के खारेपन से बेचैन हो जाती है।


वही पर एक दूसरी मछली जो समुद्र की होती है वह उसे नदी में वापस जाने का मार्ग दिखाती है,,


एक ही थीम पर आधारित लघुकथाएँ || Ek hi thim par aadharit Laghukathaye



तब नदी की मछली कहती है कि वह नदी में वापस नही जा पा रही है क्योंकि,,,



 *...लंबे समय तक धारा के साथ तैरने के कारण अब वह धारा के विपरीत नही तैर पा रही है* ।



कुलमिलाकर कहानी के थीम यह है कि-" किसी व्यवस्था के अनुकूल कार्य करना आसान है व्यवस्था के प्रतिकूल कार्य करना मुश्किल है।"



दूसरे शब्दों में कहे तो एक बार सुविधा भोगी बनने के बाद उस सुविधा के बिना कार्य करना कठिन है।




उम्मीद है कि एक ही थीम यह लघुकथा आपको पसंद आया होगा।



धन्यवाद।।


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