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एक ज्वेलरी व्यापारी का शहर में बहुत प्रसिद्ध दुकान था।
क्वालिटी युक्त समान, अच्छी सर्विस और बढ़िया व्यवहार के कारण उसके सभी दुकानों में भीड़ लगी रहती थीं।
व्यापारी की कुल चार दुकाने थी जो एक ही कतार में थी। इसमे सभी दुकानों में प्रायः बराबर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी।
उसे इन चारों दुकान से लगभग एक समान मासिक आय मिलती थी।
व्यापारी अधिकतर बाहर दौरे में रहता था ,,, अतः चारो दुकानों में उसने अपने 4 विश्वासपात्र मुनीम को नियुक्त किया था, जो अपने अपने दुकान का हिसाब किताब रखता था।
इन चारों में एक मुनीम बेईमान था,, वह अन्य मुनीमो को भी बेईमानी के लिए भड़काता था,,लेकिन वे ईमान के पक्के थे इसलिए वे उनकी बातों में नही आये।
खैर...इधर हिसाब में लगातार हेराफेरी से व्यापारी को बेईमान मुनीम पर शक हुआ।
उसने एक बार अपना दौरा बीच मे रदद् कर सभी दुकानो में धावा बोला, सभी के हिसाब दुरुस्त थे केवल बेईमान मुनीम को छोड़कर।
इस प्रसंग में व्यापारी को मुनीम पर शक इसलिए हुआ क्योंकि एक समान इनकम देने वाली 4 दुकानो में से एक में लगातार कई महीनों से कम इनकम होने लगी,, जबकि शेष में अच्छा मुनाफा हो रहा था।
यही कारण था कि बेईमान मुनीम अन्य मुनिमो को भी बरगलाया करता था,, ताकि एक साथ बेईमानी करने में सभी दुकानों का आय कम दिखे और व्यापारी को उन पर शक न हो।
इस लेख से यह निष्कर्ष निकलता है कि -
*मूर्ख -मूर्खता, आलसी-आलस्यता, धूर्त-धूर्तता और बेईमान-बेईमानी फैलाने का प्रयास करता है.....*
....ताकि वह अलग से चिन्हित होकर पकड़ में न आये।
धन्यवाद।।
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