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बात थोड़ी पुरानी है, *सन 2007* का समय था। शाम ढलने के कगार पर था, चिड़िया अपने घोंसले की ओर लौट रहे थे।
इसी समय दो मित्र *केउ और मेउ* मोटर साइकिल में धमतरी से रायपुर आ रहे थे। अभी रेडियंट पब्लिक स्कूल जो रायपुर अभनपुर के बीच है ,, को पार किये थे।
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तब दोनों मित्र देखते है कि सड़क के बीच में भीड़ लगी हुई है,
किसी गाड़ी वाले ने बाइक सवार को ठोक दिया था और भाग निकला था,, दो लोग घायल होकर सड़क में कराह रहे थे।
एक की स्थिति थोड़ी ठीक थी जबकि दूसरा गम्भीर था उसे जल्द ईलाज की आवश्यकता थी।
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लोग देखते सहानुभूति प्रकट करते फिर चले जाते, किसी ने न पुलिस को फोन किया , न एम्बुलेंस को।
वैसे भी उस समय छत्तीसगढ़ में *संजीवनी 108* जैसे तुरंत मेडिकल सेवा वाहन नही चलता था साथ ही लोग पुलिस के पचड़ों में पड़ना नहीं चाहते थे।
केउ ने इनकी सहायता करने की ठानी लेकिन मेउ ने मना किया। केउ के जोर देने पर मेउ भी उसके साथ आया ।
सबसे पहले दोंनो ने घायलों को सड़क के बीच से उठाकर किनारे में नीचे की ओर ले आये ताकि कोई ट्रक- बस उन्हें अंधेरे में कुचल न दे।
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फिर केउ ने *100 नम्बर डायल* कर पुलिस को घटना की डिटेल सूचना दी। कुछ देर बाद पुलिस और एम्बुलेंस पहुंच गए।
इसके बाद दो प्राण बचाने की खुशी में मदमस्त हुए केउ , मेउ को लेकर रायपुर चला गया।
*यकीन मानिए पुलिस ने इसके बाद कभी भी केउ को तंग नही किया।*
घटना सत्य है केवल पात्र के नाम काल्पनिक है।
धन्यवाद🙏🙏🙏🙏🙏
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