छत्तीसगढ़ बस्तर -सुकमा आज की स्थिति में भी धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र है।
यहाँ तैनात CRPF में सन 2018 के बाद पिछले 3 वर्षों में अपने ही साथियो पर गोली चलाने की 13 घटनाएं हुईं हैं जिसमें 18 जवान मारे गए हैं।
कई आत्महत्या की घटनाए भी हुई हैं जिसमे मृतकों की संख्या इसमे शामिल नही है।
पहले जहाँ हम सेना की शरीरिक फिटनेस की बात करते थे , वही अब मानसिक और भावनात्मक फिटनेस भी उतनी ही जरूरी है।
प्रश्न उठता है कि आखिर क्यों जवान अपनों पर ही गोलिया चला देते है?
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कारण -
🟢 तैनात क्षेत्र में युद्ध , नक्सल , दंगे या अन्य कारणों से अत्यधिक तनाव की स्थिति होती है जिसका दुष्प्रभाव जवानो की मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है।
🟢 अधिकारियो या सीनियर के द्वारा दुर्व्यवहार
🟢 भोजन आवास की समस्याऍ
🟢 छुट्टी न मिलना
🟢. साथियो से आपसी नोकझोंक
🟢 कई बार आर्थिक या पारिवारिक जीवन से उत्पन्न अवसाद
🟢 उचित वेतन भत्ते की कमी
🟢 मेंटोर की कमी
निवारण के उपाय -
1. सरकार और विभाग इस तरह की घटना को टालने के लिए कई उपाय करती तो है लेकिन भ्र्ष्टाचार और लागू करने की कमजोर इच्छा शक्ति इसे सफल नही होने देती।
2. भ्रष्ट अधिकारियों पर भी लगाम लगाना जरूरी जो योजनाओ की सफलता में बाधा है।
3. जवानों की मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहे इस हेतु एक पूर्णकालिक मेंटोर की नियुक्ति की जानी चाहिए।
4. जवान मानसिक रूप से ठीक रहे इस हेतु मेंटोर के साथ एक जवाबदेही हेतु एक अधिकारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
5. चूंकि जवान नक्सल और आतंकी क्षेत्रों में बहुत तनाव में रहते हैं अतः व्यवस्था ऐसी बननी चाहिए जिसमें मेंटोर खुद होकर उनके तनाव को पता करे और दूर करे।
6. यथासंभव जवानों को आर्थिक परेशानी न हो अतः वेतनमान और भत्ते ठीक हो। ताकि जवान आर्थिक कारणों से तनाव में न आये।
7. जवानों की एक शिकायत कई बार भोजन और रहने की व्यवस्था को लेकर होता है अतः इसमे सुधार हो भ्रष्टाचार न हो।
8. कई बार जवानो की आपसी छींटाकसी बढ़कर मामला हत्या तक पहुंच जाता है अतः खुशनुमा माहौल द्वारा निवारण करने और नजर रखने की आवश्यकता है
9. पर्याप्त छुट्टियां जवानों को मिलनी चाहिये।
10. उच्चाधिकारियों और कार्यालयीन कर्मचारियों के द्वारा जवानों से अच्छा व्यवहार होना चाहिए क्योंकि कई बार खराब व्यवहार भी हमले का कारण बना है।
कुलमिलाकर जवानों द्वारा अपने ही साथियो पर हमले की घटना का बढ़ना चिंतनीय है। इसकी उचित जाँच कर कारणों का सही तरीके से निदान किये जाने की भी आवश्यकता है
............. क्योंकि इस तरह की घटनाएं सेना या CRPF की छवि भी खराब करती है।
जवान यदि अंदरूनी समस्याओं से जूझते रहेंगे तो नक्सल या आतंक के विरुद्ध संघर्ष भी प्रभावित होगी।
धन्यवाद।।
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