सोमवार, 8 नवंबर 2021

नमक का दरोगा का सारांश | Namak ka daroga ka saransh

 ✍️✍️✍️✍️✍️


*दरोगा वंशीधर* ने जमींदार पण्डित अलोपीदीन को जमुना तट पर अवैध नमक ले जाते पकड़ा।



बेइज्जती से बचने के लिए जमींदार ने लाखों की *घूस* देनी चाही, ईमानदार दरोगा नही माने। 



कोर्ट में ऊँची पहुंच के चलते ज़मीदार न केवल छूट गए बल्कि *दरोगा की नौकरी गई* वह बर्बादी के कगार पर पहुँचा।




   

बाद में जमींदार खुद वंशीधर के घर जाकर उसे ससम्मान अपनी *सम्पूर्ण जायदाद का मैनेजर* बनाता है,



*क्यों???* 🤔🤔🤔



*कारण था ईमानदार आदमी की हर जगह जरूरत होना* 


जमींदार को भी उसके जैसे ईमानदार आदमी की जरुरत थी जो उसके जायदाद की रक्षा कर सके।



-प्रेमचंद लिखित *नमक का दरोगा* का सार


।।धन्यवाद।। 


🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

सबसे ज्याद जरूरी काम || Sabse jyada jaruri kam

भोलू हर रोज की तरह अपने पान ठेले पर बैठा पान बना रहा था। उसी समय एक कार आकर ठेले के पास रुका उसमें से सूट पहने एक आदमी गाड़ी के काँच को नीचे ...