एक बार समाजसेवी सज्जन पुरुष नदी में स्नान कर रहे थे, कई लड़के नदी में खेल रहे थे।
तभी एक महिला घाट में स्नान करने आई। पुरुषों के घाट में महिला के आगमन से सभी असहज हुए।
महिला को शायद महिलाओं के घाट कहाँ है? इसकी जानकारी नहीं है, यह सोचकर सज्जन पुरुष नजदीक आये और बड़ी विनम्रता से उसे स्त्रियों के घाट के बारे में बताते हुए वहाँ जाकर नहाने का आग्रह किया।
महिला भड़क उठी , उसने कहा मैं यही स्नान करूंगी। जैसे- जैसे सज्जन पुरुष उस महिला को समझाते वे और उग्र होते जाती ,, .
थक हारकर पुरूष ने अपनी राह ली।
अब चूंकि पुरूष समाजसुधारक थे अतः महिला के इस व्यवहार से चिंतित थे,,,
.. क्योंकि इससे एक नई गलत प्रथा का प्रचलन हो सकता था।
अतः वह शाम को उस महिला के घर के लोगों को घाट में हुई बात बताई और उन्हें समझाने लगे लेकिन अप्रत्याशित रूप से घर के लोगो ने पुरूष को लताड़ लगाई और भगा दिया।
समाजसेवा में अच्छे बुरे सभी तरह के लोगो से घुट चुके सज्जन पुरुष ने सोचा कि महिला और उसके घर के लोग अभी गुस्से में है इसलिए उनसे कुछ दिनों बाद बात करनी चाहिए।
माह भर बाद ...सज्जन पुरुष ने अपने साथ समाज के कुछ प्रभावशाली लोगो को लेकर महिला के घर गये और उन्हें समझाने लगे।
लेकिन इस बार उसके घर के लोगों ने धमकी देते हुए कहा कि- 'हमे तंग करना बंद करो ,, हम जैसा कर रहे हैं वैसा ही करते रहेंगे और अब घर मे आये तो पुलिस में महिला प्रताड़ना का रिपोर्ट कर देंगे।'
उक्त विवरण हमे यह बताती है कि-
आप चाहे कितना भी विद्वान हो,
विनम्र हो,
लोगों को समझाने और जागरूक करने की शक्ति रखते हों,
...... ..लेकिन समाज मे चंद लोग ऐसे मिलेंगे ही जिसे कोई भी कितना भी दिमाग लगाये ,धैर्य दिखाये उसे नही सुधार सकता ,नही समझा सकता।
ऐसे लोग तभी समझते हैं
"जब उनके साथ कोई गम्भीर घटना हो जाये जो उसे मानसिक रूप से झकझोर दे या उनके नई पीढ़ी के बच्चे शिक्षित होकर सभ्य लोगो के सम्पर्क में आये।"
ऐसे बुरे अनुभव ही हमे शिक्षा का महत्व समझाती है...
......क्योंकि शिक्षा न केवल समझ विकसित करती है बल्कि कई बार तो नई समझ भी पैदा करती है।
धन्यवाद।।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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