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किसी बड़े मिशन पर जाने के पहले हो रही प्रशिक्षण का आज आखिरी दिन था,,,
ट्रेनर ने प्रशिक्षुओं को अंतिम पाठ पढ़ाते हुए कहा-
" किसी भी मिशन को पूरा करने के लिए धैर्य सबसे ज्यादा जरूरी है , आप सभी को धैर्य रखना होगा "
सभी ने सहमति में सिर हिलाई ।
ट्रेनर महोदय ने फिर दोहराया-
"किसी भी मिशन को पूरा करने के लिए धैर्य सबसे ज्यादा जरूरी है..
आप सभी को धैर्य रखना होगा"
फिर से कहा -
"किसी भी मिशन को पूरा करने के लिए धैर्य सबसे ज्यादा जरूरी है..
आप सभी को धैर्य रखना होगा"
वही वही बाते सुनकर अब सब बोर गये,,
एक नौजवान हिम्मत कर उठा और झुँझलाते हुए कहा-
'सर आप बार -बार बात दोहराकर क्यो हमारा समय नष्ट कर रहे हो'?
ट्रेनर ने कहा -
"मैंने सिर्फ तीन बार अपनी बात दोहराई और तुम नाराज होने लगे .... तो बताओ तुम्हारा वह धैर्य कहाँ गया जिसकी हामी अभी थोड़ी देर पहले तुमने भरी थी।"
अर्थात
धैर्य रखने के बारे में सोचने और वास्तव में धैर्य रखने में बहुत फर्क है।
धन्यवाद🙏🙏
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