शनिवार, 20 नवंबर 2021

समर्पण | Samarpan in hindi

बात तब की है जब देश के अधिकतर भागो में स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं का अभाव था।धनीराम के पिता दयाराम अचानक बीमार पड़ गए और उसकी स्थित गंभीर हो गई तत्काल हॉस्पिटल ले जाना जरूरी था। 



उस समय चिखली जो रायपुर जिले का सबसे दूरस्थ गाँवो में से एक है , हॉस्पिटल हेतु पहले  महासमुंद फिर बलौदा बाजार और अंत में रायपुर की ओर देखता था। चूँकि दूरी और सुविधा की दृष्टि से महासमुंद ठीक लगा इसलिए धनीराम ने पिता को वहाँ ले जाने का फैसला किया गया। 






समर्पण | Samarpan in hindi




संयोग देखिए उसीसमय 3 किलोमीटर दूर स्थित सिरपुर और चिखली के बीच स्थित महानदी में बाढ़ आया था। यही से महासमुंद जाना था। अतः पिता को चारपाई में लेटाकर बैलगाड़ी से महानदी के किनारे तक तो ले आये लेकिन बाढ़ ने रास्ता रोक दिया। यह देखकर साथ में आये कुछ लोगो ने बलौदा बाजार ले जाने की बात की। 



अब दूसरा संयोग देखिये बलौदा बाजार जाने के लिए चिखली के पश्चिम तट पर स्थित पतालू नाला भी उफान पर था , जिसे पार किये बिना वहाँ जाना असम्भव था। 


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रायपुर ले जाने के बारे में विचार किया गया लेकिन आरंग तक बैलगाड़ी से ले जाना पड़ता जिससे होने समय की बर्बादी मरीज के लिए नुकसानकारी था ,, इसी उधेड़बुन में समय बीता जा रहा था 



शाम का समय और धीरे धीरे बढ़ रहे अँधेरे से साथ में आये लोग भी निराश होने लगे ,, कुछ ने घर ले जाकर गंगा जल पिलाने तक की बात कही। 



लेकिन धनीराम ने हार नहीं मानी थी उसने धीरे धीरे कम होती महानदी की और देखा ,,
उसने सोचा की खाट को यदि स्टेचर के समान ऊपर उठाया जाए तो 6 से 8 लोग नदी में पैदल लेकर चले तो उस पार जाया जा सकता है। 



खतरा यह था की कहि पर यदि जलस्तर सिर के ऊपर हो जाये तो क्या होगा ?? लेकिन पिता की जान बचाने के लिए धनीराम यह खतरा मोल लेने के लिए तैयार था। साथ में आये लोगो में कुछ ने विरोध किया लेकिन अंत में महानदी पार करने पर सहमति बन गई। 


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तब तक रात के 8 बज गए थे। 



पिता को चारपाई में उठाकर जब धनीराम अपने भाइयो और साथियो के साथ महानदी में उतरा तो एकाएक ठंडे जल से शरीर सिहर उठा लेकिन पिता को बचाने के जज्बे ने शायद शरीर को पुनः गर्म कर। 



जैसे जैसे वे आगे बढे कई जगह लगा की अब तो चारपाई बही। 



अंत में आठ सौ मीटर चौड़ी महानदी की प्रबल जलधारा भी इंसानी साहस  के आगे समर्पण कर गई । सिरपुर में वाहन किराया कर महासमुंद हॉस्पिटल में दयाराम को भर्ती कराया गया। 



बाद में  दयाराम जब ठीक हुए तो उसने प्राण बचाने वाले पुत्र धनीराम को रोते हुए गले से लगा लिया। पिता द्वारा गले लगाने शायद धनीराम को पिता का अनमोल उपहार लगा तभी उसके भी आँसू आ गए। 



समर्पण | Samarpan in hindi




शिक्षक के रूप में शिक्षा जगत में धनीरामजी  का जो योगदान है, वह तो महत्वपूर्ण है ही लेकिन मानवीय प्रेम और हिम्मत  की  जो मिशाल उन्होंने इस कहानी  में दी है वह शैक्षिक उपदेश का व्यवहारिक रूप है,,,



....मै भी अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ कि  मै धनीरामजी जैसे स्थानीय हीरो की कहानी लिख रहा हूँ। पिता के प्रति पुत्र का यह समर्पण निश्चित ही वंदनीय है। 


धन्यवाद। .


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1 टिप्पणी:

  1. कृपया पाठकगण ध्यान दे, यह पोस्ट सत्यघटना से प्रेरित है अर्थात सत्य और कल्पना दोनो का सम्मिश्रण है। धन्यवाद🙏🙏

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