🌸🌸🌸🌸🌸🌸
एक अलग दृष्टिकोण से देखने वाले लोग पूरे मानव जीवन को स्वार्थ पर आधारित बता देते हैं,
वह कैसे ? 🤔🤔🤔🤔
जैसे आप सुबह उठकर ब्रश करते है, नहाते है, ताकि आप स्वस्थ्य रहे या बदबू न आये या आपको अच्छा लगे इसलिए यह काम करते हैं .... अर्थात यह काम आपने एक स्वार्थ के कारण किया ।
यदि ब्रश, नहाने इत्यादि न करने से आपको कोई हानि नही होती तो स्वार्थ के अभाव में ये काम करना आप बन्द कर देते।
अब हम इसी तथ्य को भावनात्मक या इमोशनल स्तर पर लाते हैं,,,
...जहां इंसान खुशी, गम, गुस्सा, प्रेम , लगाव, नफ़रत इत्यादि भावनाओं से भरा होता है ,,, इनमें से प्रत्येक भावना के पीछे कोई न कोई कारण होता।
यानी आपको खुशी , सुख दुख , गुस्सा, प्रेम जो भी महसूस होता है उसके पीछे कोई ना कोई कारण होता है।
कुछ लोग इसी कारण को स्वार्थ कहते हैं
जैसे आप यदि किसी को नष्ट करना चाहते हैं तो आपके मन में उसके लिए नफरत की भावना आ सकती है
इसका ठीक उल्टा यदि आप किसी आगे बढ़ते हुए देखना चाहते हैं तो आपके मन मे उसके प्रति प्रेम या सहानुभूति हो सकता है
दोनों उदाहरण में स्वार्थ यह है कि पहला नष्ट हो और दूसरा आगे बढ़े।
यानी प्रेम करने के पीछे भी स्वार्थ है या कंडीशन हो सकता है,
...बिना स्वार्थ के प्रेम भी नही हो रहा है।
वही कुछ दूसरे लोग मानते हैं कि माँ ही एक मात्र ऐसी होती है जो बच्चे को बिना कंडीशन या स्वार्थ के प्रेम करती है।
देखिए कहने, सुनने, बोलने, लिखने में माँ की प्रेम अनकंडीशनल मालूम होती है ,,
माँ की प्रेम अनकंडीशनल होती ऐसा कहना सभी को अच्छा भी लगता है।
लेकिन क्या वास्तव में माँ की प्रेम अनकंडीशनल लव है?
नहीं ,,, माँ की प्रेम अनकंडीशनल नही है,,
बल्कि माँ अपने बच्चों को इसलिए प्रेम करती है क्योंकि वो बच्चा उसका अपना बच्चा है।
यानी माँ की प्रेम का कारण बच्चा उसका होना है , यही यही कारण है कि वह दूसरों के बच्चों से उस तरह या उस स्तर का प्रेम नही करती जैसे वह अपने बच्चो से करती है।
माँ दूसरों के बच्चों से हमदर्दी रख सकती हैं,, थोड़ा बहुत लगाव रख सकती है लेकिन अपने बच्चों सा प्रेम नही कर सकती। स्पष्ट है की माँ भी अनकंडीशनल लव नहीं कर पाती। अपवाद १
तब अनकंडीशनल लव क्या है ???
असल मे अनकंडीशनल लव वह प्रेम है जिसमें इंसान धरती के प्रत्येक प्राणी से बिना किसी कारण या स्वार्थ के प्रेम करता है।
संक्षेप में बिना कारण ही सभी से प्यार करना अनकंडीशनल लव है।
अनकंडीशनल लव बहुत दुर्लभ है,, पूरे संसार में गिने चुने महापुरुष ही अनकंडीशनल लव कर पाने की स्थिति में पहुंच पाये होंगे।
साथ ही उक्त में अपवाद १ में दर्शित अत्यल्प माँ भी इस श्रेणी में आ सकती है जो सभी को अनकंडीशनल लव करे।
लगता है कि वसुधैव कुटुम्बकम पर आधारित अनकंडीशनल लव शायद मोक्ष / निर्वाण/कैवल्य के ठीक पहले की स्थिति है।
लेख पसंद न आये तो आप मुझे गाली भी दे सकते हैं कोई दिक्कत नहीं है।
धन्यवाद।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें