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फेमिनिस्म के लिए हिंदी में नारीवाद/स्त्रीवाद शब्द प्रचलित है।
फेमिनिस्म एक ऐसी विचारधारा है जो महिलाओं का पुरुषों के समान अधिकार की बात करती है। इसके समर्थक *फेमिनिस्ट* कहलाते हैं।
अर्थात यह लैंगिक समानता/ जेंडर इक्वालिटी का समर्थन करती है।
यह नई विचारधारा नही है बल्कि पूरी दुनिया में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध में काफी पहले इसकी उत्पत्ति हो चुकी है।
शिक्षा के प्रचार- प्रसार और आधुनिकता की लहर से अब जाकर यह विचारधारा काफी मजबूत हुई है।
वैसे इसका फैलाव काफी हुआ है फिर भी फैलाव की तुलना में सुधार कम हुआ है,,, खासकर तीसरी दुनिया कहे जाने वाले देशों में।
फिर इस विचारधारा के परिणाम में विचलन भी बहुत दिखाई देता है , विचलन कई आधार पर देखे जा सकते है।
जैसे स्थान के आधार पर गांव-शहर में, वैसे ही धार्मिक, जातिगत या क्षेत्रीय विचलन हो सकता है।
मतलब भिन्न- भिन्न देश ,क्षेत्र ,धर्म या जाति, आयवर्ग में सुधार की मात्रा अलग -अलग है।
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खैर आज के समय में हर समझदार व्यक्ति फेमिनिस्म का समर्थन करता है। ध्यान रखें मैंने समझदार शब्द का प्रयोग किया है।
हम सब को भी फेमिनिस्म का समर्थन करना चाहिए ,, भला कौन महिलाओं पर अत्याचार को सही ठहरा सकता है?
लेकिन कहा गया है कि *अति सर्वत्र वर्जयेत* ,,, कोई विचारधारा बहुत अधिक पनपने के नुकसान भी है।
पहली दुनिया की तो बात ही छोड़िये हमारे भारत में भी इसके साइड इफेक्ट दिखने लगे हैं।
*थप्पड़ गर्ल लखनऊ और जोमैटो डिलवरी बॉय बैंगलोर* की घटना इसके प्रसिद्ध उदाहरण है। आप इस सम्बंध में गूगल या यूट्यूब में सर्च कर पुष्टि कर सकते हैं।
हालांकि महिलाओं पर हो रहे अत्याचार की तुलना में ये साइड इफेक्ट बहुत कम है।
लेकिन फेमिनिस्म विचारधारा का आड़ लेकर किसी निर्दोष को सताना ठीक नहीं है।
यानी समाज को सचेत रहना होगा कि इसका दुरुपयोग न हो। जैसे यात्रा के दौरान यदि भीड़ ज्यादा न हो तो 20 साल की महिला को सीट देने की जगह किसी 60 साल के बुजुर्ग पुरूष को सीट देना ज्यादा ठीक है।
सच्चा फेमिनिस्म यह नहीं है कि महिलाएं पुरुषों से बढ़कर है, बल्कि वह तो *समानता के उस सिद्धांत* को मानता है जिसके अनुसार कोई एक दूसरे से बड़ा नही है ...
....स्त्री और पुरूष दोनो बराबर है,,, दोनो समान हैं।
धन्यवाद।।
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