इस प्रश्न को मैं दो हिस्सों में करके चर्चा करना चाहूंगा-
स्वतंत्रता सेनानी के शहादत से लोगो का प्रभावित होना स्वभाविक है
क्योंकि ऐसी भावनाएं स्वतः ही दिल से निकलती है। हम ऐसे विषय से बहुत ज्यादा इमोशनली जुड़े होते है।
यानि किसी व्यक्ति को शहादत के सम्बंध में बातचीत करने में ज्यादा सोचने विचरने या माथापच्ची करने की जरूरत नहीं पड़ती , लोग इसका समर्थन भी करते है।
आप धारा प्रवाह अपनी विचार अभिव्यक्ति कर सकते है।
शहीद की विचारधारा के विभिन्न पहलू जो राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक या अन्य विषयों को छूता हो , इस पर चर्चा करने की क्षमता कम लोगो मे होती है ।
क्योंकि इन विषयों पर चर्चा करने की मानसिक समझ और योग्यता आवश्यकता होती है ।
एक अनुमान के अनुसार विश्व में केवल 5 % लोग की समझदार होते है।
साथ ही राजनितिक, सामाजिक , धार्मिक मुद्दे गंभीर विषयो की श्रेणी में आता है हल्की सी चूक कठोर आलोचना होने लगती है।
अतः गूढ़ विषयों पर चर्चा के लिए लोगो की उपलब्धता कम होती है।
वैसे भगत सिंह समानता पर सोशलिस्ट विचारधारा से प्रभावित थे।
निष्कर्ष यह है कि हमे व्यक्ति पूजा से बचकर उसके विचारधारा के अध्ययन पर जोर देना चाहिए और यदि सही लगे तो उसे व्यवहारिक रूप से अपनाने पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि…
… भगतसिंह से महान उसकी वह विचारधारा है जो उसे भारत का सबसे महानतम शहीद बनाया।
जयहिंद🙏🙏
अच्छा है
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