बुधवार, 10 नवंबर 2021

आमिर खान और किरण राव का तलाक : धार्मिक - पारिवारिक पहलू | Aamir khan aur kiran rao ki talak

 आमिर खान और किरण राव के तलाक के साथ बॉलीवुड में एक बार फिर विवाह और तलाक के मुद्दे सुर्खियों में है।


वैसे विवाह और तलाक पारिवारिक विषय है जो सामाजिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिस पर  लोग अपने अपने तऱीके से इस बारे में अपना विचार रख रहे है।



आज लोग इस तलाक को नैतिकता, नारीवाद, पारिवारिक मूल्य से जोड़कर बात कर रहे है लेकिन ,,,


सबसे ज्यादा चर्चा धार्मिक पहलू को लेकर हो रही है , खासकर सोशल मिडिया में तो इसकी बाढ़ आ गई है। 


आइये पहले विचारधारा के अनुरूप नाराजगी या विरोध या समर्थन कैसे व्यक्त किया जा रहा है पहले उसे देखते है -


1 नैतिकतावादी -

                        इनका कहना है की तलाक बच्चो के लिए विशेष रूप से हानिकारक है। 



2. नारीवादी या फेमिनिस्ट -

                       इनके अनुसार पुरुष प्रधान समाज में नारी प्रताड़ित है क्योकि पुरुषवादी सोच उन्हें एक स्त्री से संतुष्ट होने नहीं देता जिसके कारण पुरुष कई विवाह करता है। और तलाक लेता है। वही पर महिला उपेक्षित रहती है। 

 


3. पारिवारिक मूल्य -

                       इनकी अगुआई प्रायः माँ बाप बड़े बुजुर्ग करते है उनके अनुसार तलाक से परिवार की बदनामी , मनमर्जी , बड़ो की बात न मानने की बढ़ती प्रवृत्ति आदि 



4. धार्मिकतावादी -

                          ये लोग इस तलाक को लव जिहाद, धार्मिक षड्यंत्र मानते हुए विरोध कर रहे। ये हर मामले को धार्मिक दृष्टि से देखते है। वास्तव में इन्हे तलाक से दुष्प्रभावित महिलाओ या बच्चो की फ़िक्र नहीं है। 



5. व्यक्तिवादी या स्वछंदतावादी -

                            इनका विचार है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने मामलो में व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं अपनी मनमर्जी व अपने  तरीके से जीवन जीने का अधिकार है। किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं। ये लोग केवल खुद को पहले देखते है। प्रायः ये स्वतंत्रता कि सीमा को नहीं पहचानते। 



निष्कर्ष -

              सही मायनो में देखा जाय तो तलाक किसी व्यक्ति का निजी मसला है, अक्सर हजारो तलाक रोज होते है लेकिन जब बात सेलेब्रिटी के तलाक की हो तो लोग मजे लेने लगते है। वही आमिर और किरण के मामले  हो रहा है,,आग में घी का काम धार्मिक एंगल कर रहा है। 


               खैर तलाक कोई अच्छी चीज तो है नहीं जिसकी प्रसंशा की जाय , तलाक लेने वाले दोनों कपल्स के साथ बच्चो की न केवल मानसिक अवस्था पर बुरा प्रभाव डालता,,,बल्कि बच्चो का भविष्य भी असुरक्षित हो जाता है।


               साथ ही कपल्स पर आश्रित बूढ़े माँ बाप के लिए भी तलाक कष्टकारक होता है क्योकि उन्हें बुढ़ापे में अपने बच्चो से उनकी देखभाल करने की अपेक्षा रहता है लेकिन तलाक लेने वाले अस्थिर चित्त कपल्स शायद ही अपने माता  पिता और बच्चो की अपेक्षाएं पूरी कर पाते होंगे। 


धन्यवाद।।

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