एक राज्य के राजा जब बूढ़े हो गये तब उसे अपने एकमात्र अयोग्य पुत्र के भविष्य की चिंता हुई। उसने सोचा कि राज्य पुत्र को सौंपने के पहले किसी योग्य व्यक्ति को संरक्षक नियुक्त कर दी जाये, जो भावी राजा को मुसीबतों से बचायें।
संरक्षक पद के लिए मंत्रियों सहित आम जनता से भी लोगो को आमंत्रित किया गया। इन सभी को विभिन्न परीक्षण से गुजरना पड़ा।
अंत में तीन उम्मीदद्वार A, B एवं C का चयन अंतिम परीक्षण के लिए किया गया। यह परीक्षण स्वंय राजा द्वारा होना था।
संयोग से इसी समय राजा के अधीन रहे तीन करद राज्यो में विद्रोह होने लगे , राजा ने तीनों को एक- एक राज्य में शांति बहाली के लिए भेजा।
पहला राज्य-
A ने स्वयं सेना की कमान संभाली, बड़ी वीरता से सेना का नेतृत्व करते हुए सभी विद्रोहियों को खत्म किया और राज्य को पुनः राजा के अधीन में ला दिया।
दूसरा राज्य -
B ने कूटनीति का सहारा लिया विद्रोहियों को बातचीत के लिए बुलाया साथ ही सेना को तैयार भी रखा। कुछ विद्रोही समझौते के लिए तैयार थे अतः राजा की अनुमति प्राप्त कर उनसे समझौता किया गया। जो लोग फिर भी नही माने उनको सेना ने नष्ट कर दिया।
तीसरा राज्य -
C ने चालाकी दिखाते हुए विद्रोहियों को यकीन दिलाया कि वह सेना सहित विद्रोह में शामिल होने आया। विश्वास अर्जन कर धीरे धीरे उसने उस राज्य की सत्ता हथियानी शुरू की और वहाँ का शासक बन बैठा। फिर सभी विद्रोहियों को गिरफ्तार कर राज्य को राजा को सौप दिया।
राजा का निर्णय
राजा के लिए निर्णय लेना कठिन था , लोग अपने- अपने तर्क के साथ A, B व C का समर्थन कर रहे थे लेकिन ज्यादातर लोग C का समर्थन कर रहे थे क्योंकि उसके अभियान में एक सैनिक भी नही मारा गया और रक्तपात भी नहीं हुआ।
दूसरे दिन राजा ने B को संरक्षक बनाने की घोषणा की , बाद में रानी ने इसका कारण पूछा तो राजा ने बताया कि -
'A वीर और आज्ञाकारी है , वह अच्छा सेनापति बन सकता है लेकिन अच्छा संरक्षक नही उसने विद्रोहियों पर सीधे बल प्रयोग किया जो कि एक संरक्षक का गुण नही है।'
'C चालक है और थोड़ा धूर्त भी शक्ति हाथ में आते ही वह निरंकुश हो गया था। राजा को सूचित किये बिना ही वह शासक बन गया था। अतः ऐसे लोग बहुत गुणवान राजा के अंतर्गत रह कर अच्छा कार्य कर सकते है लेकिन अयोग्य शासक के आते ही उसमे राजा बनने की महत्वाकांक्षा जाग उठेगी।'
'वही B ने संरक्षक की अच्छी योग्यता दिखाई, उसने बातचीत और सेना दोनो का उपयोग किया, विद्रोहियों से समझौते में राजा की राय जानी फिर निर्णय लिया। भले रक्तपात भी हुआ लेकिन उसने विद्रोहियों की समस्या जानी और समझौते की कोशिश की।'
तो सार यह है कि ...,,
पुत्र की अयोग्यता को देखते हुए राजा को अच्छे बुरे की सलाह देने वाले और समस्याओं से संरक्षण देने वाले व्यक्ति की जरूरत थी न कि आँख बंद कर आज्ञा मानने वाले और न ही मौका मिलने पर सत्ता हथियाने वाले की।
बहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंVery good
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