किसी जमाने में जब पेड़ भी एक जगह से दूसरी जगह चलते थे।
तब एक पहाड़ के नीचे तराइयों में चारो ओर कुछ नही था,, पेड़-पौधों की बात तो दूर घास तक नही उगी थी उस निर्जन स्थान में। बस चारो ओर पत्थर, रेत और बीहड़ थे। हाँ कुछ पेड़ पहाड़ के ऊपर जरूर थे।
वही एक पुराना पेड़ भी न जाने कब से तराइयों के नीचे ठहरा था।
एक दिन वहाँ एक युवा पेड़ चलता हुआ आया और पुराने पेड़ से पूछा- 'दादा जी! मुझे पहाड़ के ऊपर जाना है रास्ता नही मालूम, कृपया आप बता देंगे क्या?'
उसकी विनती सुन पुराने पेड़ ने कहा- 'हाँ क्यों नहीं, लेकिन तुम पहाड़ पर क्यों जाना चाहते हो।'
युवा - 'असल मे मैं सबसे बड़ा और सबसे ऊँचा पेड़ बनना चाहता हूँ। पहाड़ में रहने से मेरी यह इच्छा पूरी हो सकती है।'
बूढ़े पेड़ के होठों पर मुस्कान दौड़ पड़ी जैसे किसी बच्चे ने बचकानी बात कह दी हो।
बूढ़े पेड़ ने कहा - 'देखों बेटा! यह पथरीली, रेतीली और कठिनायों से भरा सूखी जगह। जल का कही कोई स्रोत नहीं है। यहाँ भूमिगत पानी भी बहुत गहराई में मिलता है, इसीकारण यहाँ पेड़ो का टिकना मुश्किल है।'
आगे बूढ़े पेड़ ने पूछा- 'वैसे तुम कहाँ से आये हो और यहाँ कैसे पहुंचे?'
युवा पेड़- 'हम दूर देश से आये है वहाँ बहुत हरियाली है। यहाँ आने के लिए दो मार्ग थे, हम लोग हरियाली वाले मार्ग से आये क्योंकि दूसरा रास्ता तो बिल्कुल मरुस्थल था।'
इसकी बाते सुनकर बूढ़ा पेड़ बोला- 'बेटा! तुम लौट जाओ, यहाँ की कठिन स्थिति में कोई पेड़ यहाँ नही टिक पाता, बरसात आने में अभी चार महीने बचे हैं।'
आगे उसने कहा- 'पहाड़ के ऊपर रहना तो और भी मुश्किल है, तुम्हे पानी कहां से मिलेगा? देखों सैकड़ों वर्षों मे चंद पेड़ ही पहाड़ पर टिक सके हैं। बेटा तुम लौट जाओ।'
युवा पेड़ ने पूछा- 'लेकिन बाबा यहाँ रहने का कोई तो उपाय होगा न।'
बूढ़ा पेड़- हाँ एक उपाय तो है लेकिन..।
उसी समय युवा पेड़ के साथी वहाँ पहुँच गये जिसने उसके साथ सफर की शुरुआत की थी।
बूढ़े की बात अधूरी रह गई थी,, इस बीच युवा पेड़ को उसके साथियों ने कहा- 'चलो अच्छा हुआ हम सब मिल गये,, आओ पहाड़ के ऊपर चलते हैं।'
युवा- 'मैं अभी इस बाबा से ऊपर जाने का रास्ता पूछ रहा था।'
साथीगण - 'उसकी जरूरत नहीं है, आओ हम ,रास्ता ढूंढ लेंगे।'
उसने बूढ़े से विदा लिया और साथियों के साथ चला गया।
बूढ़ा कातर नेत्रो से उसे जाता हुआ देख एक गहरी साँस छोड़ी।
युवा पेड़ अपने साथियों के साथ पहाड़ पर रहने लगा लेकिन जल की कमी से वे सभी कुछ भी हफ्ते में मारे गये।
कई वर्ष बीत गये। एक दिन पहाड़ पर चढ़ने के लिए एक और युवा पेड़ आता है, आस पास की जानकारी के लिए वह उसी बूढ़े पेड़ से पूछताछ करता है।
बूढ़ा पेड़- 'पहले यह बताओ तुम कहाँ रहते हो, किस रास्ते से आये हो?'
युवा- 'मैं दूर देश का रहने वाला हूँ, कई महीनों पहले निकला था, मैं मरुस्थल वाले रास्ते से होकर आया हूँ।'
उसका उत्तर सुनकर बूढ़ा प्रसन्नचित्त होकर कहता है - आओ बेटा तुम्हारा स्वागत है,, वह रहा ऊपर पहाड़ जाने के रास्ते। तुम निश्चिंत होकर पहाड़ में रह सकते हो।
वह युवा पेड़ पहाड़ के ऊपर जाकर रहने लगता है। वह इस दुष्कर जगह में आसानी से कई सालों तक टिक जाता है।
वह उन चंद पेड़ो में शामिल हो जाता है जो आसमान की ऊँचाइयों में अपना अस्तित्व तलासते है।
धन्यवाद।।

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