सोमवार, 17 जनवरी 2022

मूर्ख कौन ? || Murkh kaun

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बात सन 1950 के आसपास की है,,


तब पूरे भारत के समान *छत्तीसगढ़* में भी अंधविश्वास का बोल बाला था,



तांत्रिक- ओझा या बैगा- गुनिया लोग भोले भाले जनता को देवी देवताओं का डर दिखा कर भेड़-बकरी, मुर्गा- मुर्गी इत्यादि का बलि देकर खूब धन ऐंठते थे।


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तब किसी घर के मुखिया *रामचरण* को भी यही डर दिखाया गया कि देवता नाराज है बलि देनी होगी।



रामचरण ने कहा 'देवता की पूजा पूरे विधि विधान से सम्मानपूर्वक होगी लेकिन किसी जीव की हत्या नही होगी।'


यानी रामचरण *सेत पूजा* के पक्ष में थे जिसमें खीर पूड़ी पकवान के चढ़ावे से पूजा अर्चना होता है।



बैगा गुनिया ने डराते हुए कहा 'बिना बलि दिये देवता शांत नहीं होंगे बल्कि बाद में तंग करेंगे।'


लेकिन रामचरण ने कहा 'आप पूजा कीजिए बाकी बाद में जो होगा मैं संभाल लूंगा।'



तब से रामचरण के घर में हमेशा सेत पूजा होने लगी ,,, *बलि पूजा* हमेशा के लिए बंद हो गया।



इसके बाद रामचरण और उसके परिवार ने कई पीढ़ी तक सुख शांति से जीवन यापन किया, उन्हें कोई समस्या नही हुई बल्कि वे और उन्नत हुए।


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अब बात करते हैं सन 2021 में सरकारी नौकरी कर रहे एक दूसरे परिवार का मुखिया *श्यामचरण* की...


बैगा गुनिया ने इसे भी देवताओं के नाम पर डराया,, बलि देने को कहा।



श्यामचरण ने तत्काल 5 बकरों की बलि दी,, भव्य आयोजन हुआ, पियक्कड़ों की फौज आमंत्रित हुई मदिरापान पर सब खूब झूमे।


ऐसा लगा जैसे पूजा तो केवल बहाना है, असल में मांस मदिरा खाना है।


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अब बताइये कौन समझदार है? गवाँर कौन है??

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अनपढ़ रामचरण या पढ़ा लिखा सरकारी सेवक कथित बुद्धिजीवी श्यामचरण।


लोग अक्सर पुराने जमाने के लोगो को *नासमझ-गवाँर* कहते है ,,,


लेकिन वे भूल जाते है कि उस कठिन दौर में भी रामचरण ने अंधविश्वास के विरुद्ध साहस पूर्ण कदम उठा लिया...



...वही आज आधुनिक युग में कथित  जागरूक लोग भी थोड़ा सा साहस दिखाने में न केवल घबरा रहे है बल्कि सामाजिक कुप्रथाओं के सामने नतमस्तक तक हो जाते है।


सार यह है कि -


*किसी स्थान के प्रभावशाली लोग या परिवार के मुखिया जब हिम्मत कर एक बार सामाजिक बुराईयो के विरुद्ध तन कर खड़ा हो जाते है, तो क्या मजाल की कुप्रथायें जीवित रह सके।* 


              *----------- सत्य घटना से प्रेरित*


धन्यवाद।।


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