मंगलवार, 18 जनवरी 2022

ब्लैक मैजिक के पीछे का सच || black magic ke pichhe ka sach?

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एक तरफ जहाँ ब्लैक मैजिक, नजर लगना जैसे चीजो को साइंस अंधविश्वास मानकर सीधे खारिज करती है, वही योग इस पर रिसर्च करती है।



वैसे साइंस की कई शाखाएं भी ऐसा रिसर्च करने लगी है जिसे *डिस्कवरी या नेशनल जियोग्राफी* में देख सकते हैं।


लेकिन इनके रिसर्च के परिणाम काफी उलझन भरे हैं, वही योग इस मामले में काफी क्लियर दिखाई देता है।



योग पूरे जगत को ऊर्जा से निर्मित मानता है ,, जिसमे *डिस्ट्रक्टिव और क्रिएटिव ऊर्जा* दोनो है।



डिस्ट्रक्टिव के अंतर्गत अंधविश्वास के तत्व आते है, जो किसी को हानि पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई जाती है।





इसी हानि से बचाने में क्रिएटिव एनर्जी की प्रयोग का दिखावा करके बैगा, तांत्रिक, ओझा इत्यादि आम लोगो को लूटते है।


जिसतरह अम्ल , क्षार के प्रभाव को उदासीन कर देती हैं वैसे ही हानिकारक उर्जा को क्रिएटिव उर्जा प्रभावहीन कर देती है।



 *क्रिएटिव ऊर्जा हर व्यक्ति योग के द्वारा खुद आसानी से क्रियेट कर सकता है फिर उसे बैगा इत्यादि के जंजाल में फंसने की जरूरत नहीं है।



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अब बात करते है ब्लैक मैजिक, नजर लगना जैसे अंधविश्वासी तत्व किस व्यक्ति पर असर करता है....


......इसमे एक मजेदार तथ्य यह है कि *जो व्यक्ति अंधविश्वास को जितना ज्यादा मानता है,,, प्रायः वही लोग ब्लैक मैजिक और नजर लगने जैसी बातों से परेशान होते है।* 



अर्थात जो इन पर शिद्दत से विश्वास करता है उन पर ही ब्लैक मैजिक और नजर लगना असर करता है।




यही कारण है कि इनका असर विज्ञान पर विश्वास करने वाले *शहरी क्षेत्रों* में कम होता है ,,


जबकि साइंस को कम मानने वाले *ग्रामीण क्षेत्रों* में उसमे भी *जंगली क्षेत्रों* में इसका बोलबाला ज्यादा होता है।



उक्त समस्त बातें योग के विभिन्न सिद्धान्तों के अनुसार बताई गई है। कृपया इसे अक्षरशः मेरा विचार न समझे।


धन्यवाद।।


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