सरल दिखने वाले इस प्रश्न का उत्तर जटिल है। मैं आसान ढंग से समझाने की कोशिश करता हूँ।
आत्मज्ञान क्या है -
आत्मज्ञान यानी स्वंय के बारे में सब कुछ जान लेना।
आत्मज्ञान=आत्मपरिचय=कैवल्य=निर्वाण=मोक्ष=ईश्वर प्राप्ति
आत्मज्ञान कैसे प्राप्त करे-
आत्मज्ञान प्राप्त करने के रास्ते निम्नलिखित है-
1.भक्ति द्वारा- ईश्वर के प्रति पूर्णतः समर्पण जैसे तुलसीदास
2. ज्ञान द्वारा- अद्वैत साधना से जैसे शंकराचार्य
3. शून्यता द्वारा- कार्य के कारण को नष्ट कर अंत मे कार्य कारण दोनों न होने पर अज्ञानता नष्ट हो जाएगी और निर्वाण मिलेगा जैसे बुद्ध
4. उच्च नैतिक मूल्यों द्वारा - यह आस्तिक व नास्तिक दोनो के लिए सम्भव है।
5. कर्मवाद या जनसेवा द्वारा - कर्म या जनसेवा निःस्वार्थ होने चाहिए
चित्र द्वारा आप आत्मज्ञान के चरण को भलीभांति समझ सकते है-
ध्यान देने वाली बात यह है कि कैवल्य और निर्वाण में मोक्ष का अर्थ ईश्वर प्राप्ति नही है बल्कि अनंत में लीन होने से है क्योंकि वहाँ भगवान की संकल्पना नही की गई है।
नास्तिक होकर भी आप आत्मज्ञान या मोक्ष प्राप्त कर सकते है इसके लिए शून्यता, नैतिकता एवं निः स्वार्थ कर्म का रास्ता बताया गया है।
साथ ही बिना ईश्वर ध्यान के नैतिकता नही आती है , इस प्रकार के बेकार के बहस में न पड़े क्योंकि....
....जापान में अधिकांश नास्तिक धर्म के लोग हैं लेकिन ईमानदारी , देशप्रेम जैसे नैतिकता पूर्ण बातें हम भारतीयों से ज्यादा उनमे कूटकर भरी है।
सारांश यह है कि आत्मज्ञान कैसे प्राप्त करे इसके लिए ऊपर में जो रास्ते बताये गये है उनमें से जो आपको जचता है उसे अपनाये और आत्मज्ञान प्राप्त करे।
Sundar lekh
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