समुद्र के किनारे एक तोता और गौरैया रहते थे। दोनो में अच्छी जमती थी इसलिए उनकी दोस्ती हो गई थी।
एक दिन बातो ही बातो में दोनों समुद्र पार करने की बात करते है।शर्त लगाते है कि जो पहले पार करेगा, उसके लिए एक माह के दाना पानी की व्यवस्था जो हारेगा वह करेगा।
दोनों उड़ान के लिए तैयार हो जाते है, फिर समुद्र की ओर उड़ना आरम्भ कर देते है। शुरू में दोनों बड़े जोशखरोस से उड़ते है।
थोड़ी दूर जाने के बाद गौरैया को थकान महसूस होता है, उसे लगता है कि यह उसके बस की बात नही है। वह बगल में उड़ रहे तोता को यह बात बताता है और वापस किनारे की ओर आ जाता है।
उधर गौरैया को वापस जाते देख तोता बड़ा प्रसन्न होता और एक महीने के मुफ्त भोजन के सपने में खो जाता है।
जल्द ही तोता को भी थकान होने लगता है लेकिन वह आगें की ओर उड़ते ही रहता है।
अंत मे तोता इतना तक जाता है कि उसे चक्कर आने लगा तब वह इधर उधर देखता है कि कही जमीन मिल जाये, लेकिन वहाँ तो केवल पानी ही पानी था।
अब वह वापस घर जाने की बात सोचता है, पीछे मुड़ता है लेकिन तब तक उसमें इतनी शक्ति नही बची थी कि वापस जा सके और वही समुद्र में गिर कर मर जाता है।
निष्कर्ष -
यह कहानी हमे बताता है कि किसी भी क्षेत्र में कार्य आरम्भ करने के पहले हमें अपनी विशेषता और कमी की जानकारी प्राप्त कर उसके अनुसार योजना बनानी चाहिए।
अपनी शारिरिक, मानसिक, तकनीकी एवं आर्थिक क्षमता का विश्लेषण कर हमें उसमे कमी- बेशी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी चाहिए।
जैसे दोनो पक्षियों ने आसपास से गुजरने वाली जलयान के समय को ध्यान में रखकर उड़ने की बात सोची होती तो शायद वे सफल हो जाते।
क्या यह प्रसंग निराशावादी है?
कहानी में समुद्र पार करने का निर्णय अचानक लिया गया बिना अपनी क्षमता को ध्यान में रखें , अतः गौरैया अपने उद्देश्य में सफल नहीं हुआ और अपना नुकसान करते हुए उस कार्य को छोड़ना पड़ा। वहीं तोता को इस गलती की कीमत डूबकर चुकानी पड़ती है।
प्रसंग का उद्देश्य बड़े काम करने के लिए हतोत्साहित करना नही है बल्कि सावधानी रखते हुए इसकी पर्याप्त तैयारी के सम्बंध में सीख देने से है।
जोश+पूर्व तैयारी+सटीक रणनीति से हम असम्भव कार्य को भी सम्भव कर सकते है।
धन्यवाद🙏🙏
Sahi bat
जवाब देंहटाएंअच्छी कहानी
जवाब देंहटाएंबहुत ही बेहतरीन 🙏
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