प्राचीन काल से ही दान की महत्ता का उल्लेख होता आया है। ग्रंथो किस्से कहानियों से होते हुए वर्तमान मे भी हमे कई दानवीर मिल जाएंगे। कुछ लोग प्रश्न उठाते है कि दानी बड़ा है या दान करने का काम बड़ा है। आइये यह जानने का प्रयास करते है।
दरअसल दान की क्रिया को सम्पन्न करने के लिए तीन चीजो की आवश्यकता होती है-
1 दानदाता या दानी
2 दान प्राप्तकर्ता
3 दान की गई वस्तु -इसका रूप भौतिक या अभौतिक हो सकता है।
सर्वप्रथम दानी के मन में दान करने की भावना का संचार होगा फिर वह दान प्राप्तकर्ता को दान करता है। यदि दानदाता हो लेकिन दान प्राप्तकर्ता या दान की वस्तु न हो तो दान की क्रिया पूर्ण नही हो पाएगी। फिर भी दानदाता के मन मे दान करने की उठी भावना की अवश्य प्रशंसा होनी चाहिए।
दान की स्थिति-
दान पूर्ण करने के लिए दानी , दान प्राप्तकर्ता एवं वस्तु की आवश्यकता होगी, किसी भी एक के बिना दान पूरा नहीं होगा।
दानी एवं दान की तुलनात्मक स्थिति -
दान जो अपने आप मे एक पवित्र काम माना गया है, बिना दानी के अधूरा है। वास्तव में दान और दानी एक दूसरे के लिए कार्य-कारण दोनों है, एक के अस्तित्व के बिना दूसरे की संकल्पना नही की जा सकती।
फिर कौन बड़ा है ये कैसे जाने। देखिये दानी, दान प्राप्तकर्ता और वस्तु तीनो नाशवान है और एक भी नष्ट हुआ तो दान की प्रक्रिया पूर्ण नही होगी। तो दानी और दान दोनो बड़ा नही है उससे भी बड़ा है दान करने की पवित्र भावना जो दान पूर्ण न होने पर भी विद्यमान रहती है।
संक्षेप में कहे तो दान किसी व्यक्ति के निःस्वार्थ सहयोग करने के विचार का व्यवहारिक रूप है तब सहयोगकर्ता एवं सहयोग के इस कार्य में से किसी एक को बड़ा कैसे कहेंगे अतः सहयोग का विचार ही महान है।
धन्यवाद।
Very nice
जवाब देंहटाएंGood ✔✔✔✔
जवाब देंहटाएंVery nice
जवाब देंहटाएंKya bat hai
जवाब देंहटाएंSupereb bro
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