सोमवार, 16 मई 2022

Best hindi kahaniya : जादुई एसी | Jadui AC

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गर्मी का दिन था, कूलर बिगड़ने पर घर के वृद्ध ने मैकेनिक बुलाई।



मैकेनिक घर आने पर कूलर को देखने लगा।



बुजुर्ग गर्मी को लेकर बड़बड़ा रहा था,, 'बड़ी गर्मी है भाई!  इस बार बड़ी गर्मी हैं।'



मैकेनिक मुस्कुराया और कहा - 'गर्मी लग रही है चाचा! तो पेड़ भी लगाया करो ।'



बुजुर्ग तनिक रूखे स्वर में बोले- 'हाँ जैसे पेड़ लगाना मेरे अकेले का ठेका है।'



अब तक मैकेनिक ने कूलर का मुआयना कर लिया था, बताया कि मोर्टर और पँखा दोनों खराब है। दुकान ले जाना होगा। 



मैकेनिक ने अपना तामझाम समेटा और वृद्ध के साथ दुकान की ओर प्रस्थान किया।


Best hindi kahaniya : जादुई एसी | Jadui AC


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रास्ते मे मैकेनिक ने कहा- 'कूलर बार - बार बिगड़ रहा जितने पैसे आप उसे बनवाने में खर्च कर चुके हो, उसमे थोड़ा और मिला देते तो एसी आ जाता।'



बुजुर्ग - तो फिर क्या एसी खरीद लू?


मैकेनिक - हाँ।



कुछ सोचते बुजुर्ग ने पूछा- 'बेटा ये एसी, कूलर से ज्यादा ठंडा कैसे करता है?'



बुजुर्ग की उत्सुकता देखकर मैकेनिक उसे समझने लगा- 'देखो चाचा कूलर पानी से हवा में नमी मिलाकर उसे ठंडा करता है। नमी एक लिमिट तक ही ठंडा रहता है,, अतः हवा भी उतना ही ठंडा होता है।'



उसने आगे बताया- 'एसी में इस तरह की कोई लिमिट नही है, वह हवा से गर्मी को मन चाहे स्तर तक चूस लेती है फिर गर्मी को बाहर और ठंडी हवा को अंदर  छोड़ देती हैं। क्यों है न बिल्कुल जादू की तरह?

बुजुर्ग मुस्कुराया।


💦🫧💦🫧💦🫧💦



मैकेनिक ने पूछा- 'वैसे चाचा आप मुम्बई के लगते नही हो कही बाहर गाँव से आये हो क्या है आप की कहानी ?'



वृद्ध ने बुझे मन से कहा- 'हाँ बेटा! हम नर्मदा घाटी के रहवासी है। दो सन्तानों में अभी मैं बेटी के घर मुम्बई में रह रहा हूँ...


...पुत्र को नर्मदा मईया के आँचल रूपी जंगल बचाने की सनक रहती थी। रात-दिन आंदोलन, धरने, सभा, प्रदर्शन में उलझे मेरे बेटे को पता नही किसने गोली मार दी। लोग कहते है लकड़ी माफिया या रेत माफिया में से किसी का काम होगा।'



रुंधी आवाज में बूढ़ा बोला- 'पुलिस भी हत्यारों को नही पकड़ पाई।


आगे वह कहता है-" मेरा बेटा हमेशा कहता था कि कुछ थोड़े से लोग अपने फायदे के लिए सारे संसाधनों पर साँप की तरह कुंडली मारे बैठा है। वही जहर रूपी कूड़ा जनता के लिए छोड़ रहा है"फिर मैकेनिक की ओर देखकर बुजुर्ग कहता है- 'ठीक तेरे 'जादुई एसी' की तरह।



मैकेनिक को बुजुर्ग की आखिरी पंक्ति शायद समझ में नही आई। लेकिन उसे दुखी देखकर उसकी पूछने की हिम्मत नहीं हुई। वह असमंजस सा चेहरा लिये दुकान पहुंचा।



मैकेनिक - 'तो चाचा आपके लिए एक एसी निकाल दूँ?'



वृद्ध ने आँखों मे चमक लिए हुए कहा- 'नही बेटा! एक नया कूलर दे दो,, जो मेरे बेटे की तरह सबको ठंडक दे,,,बिना किसी को हानि पहुँचाये।'



मैकेनिक ने अनमने ढंग से सहमति में  सिर हिलाई।



धन्यवाद



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